ट्रेंडिंग स्टोरी
विज्ञापन

सिरौली में गरीबों के राशन पर डाका! कोटेदार-बिचौलियों की सांठगांठ के आरोप, खुलेआम बिक रहा सरकारी अनाज

Spread the love

 

सिरौली में गरीबों के राशन पर डाका! कोटेदार-बिचौलियों की सांठगांठ के आरोप, खुलेआम बिक रहा सरकारी अनाज

राशन की दुकान या काला बाज़ार का अड्डा? कार्डधारकों का हक़ बेचने का खेल, कार्रवाई की उठी मांग

रिपोर्ट : विवेक गुप्ता 

सिरौली। कस्बे के मोहल्ला साहूकारा स्थित सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान एक बार फिर विवादों में है। स्थानीय लोगों ने राशन वितरण व्यवस्था में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और सरकारी खाद्यान्न के कथित काला बाज़ारी के गंभीर आरोप लगाए हैं। लोगों का कहना है कि गरीबों के लिए आने वाला राशन जरूरतमंदों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पा रहा, जबकि बीच में ही उसके बिकने का खेल लंबे समय से चलता आ रहा है।

क्षेत्रवासियों का आरोप है कि राशन वितरण के दौरान नियमों का पूरी तरह पालन नहीं किया जा रहा। उनका कहना है कि कुछ मामलों में लाभार्थियों के राशन कार्ड या पर्चियां पहले ही एकत्र कर ली जाती हैं और उनके हिस्से का खाद्यान्न कथित रूप से बिचौलियों के माध्यम से खपा दिया जाता है। शिकायत करने पर भी संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, जिससे लोगों में नाराजगी लगातार बढ़ रही है।

सबसे अधिक चर्चा इस बात की है कि सरकारी राशन की दुकान के सामने ही अनाज खरीदने वाले लोगों की सक्रियता बनी रहती है। स्थानीय लोगों का दावा है कि कई लाभार्थी राशन लेने के तुरंत बाद वहीं अनाज बेच देते हैं। आरोप यह भी है कि यह पूरा सिलसिला जिम्मेदारों की जानकारी में होने के बावजूद वर्षों से चलता आ रहा है, लेकिन इसे रोकने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। इसी वजह से कोटेदार और बिचौलियों की मिलीभगत को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो राशन वितरण व्यवस्था से जुड़े कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। लोगों ने मांग की है कि पात्रता की दोबारा जांच कर अपात्र कार्डधारकों के राशन कार्ड निरस्त किए जाएं तथा संबंधित दुकान के स्टॉक, वितरण रजिस्टर और रिकॉर्ड की गहन जांच कराई जाए।

क्षेत्र के लोगों का कहना है कि सरकार गरीबों को मुफ्त और सस्ता राशन उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन यदि जमीनी स्तर पर इसी तरह अनियमितताएं होती रहीं तो योजना का उद्देश्य ही प्रभावित होगा। अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेता है और जांच के बाद क्या कार्रवाई करता है।

Saurabh Gupta
Author: Saurabh Gupta