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जनसुनवाई की बदली तस्वीर: एफआईआर दर्ज करने में लगातार अव्वल रहा बरेली, आसान व्यवस्था से बढ़ा लोगों का भरोसा

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जनसुनवाई की बदली तस्वीर: एफआईआर दर्ज करने में लगातार अव्वल रहा बरेली, आसान व्यवस्था से बढ़ा लोगों का भरोसा

रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता 

बरेली। जनसुनवाई व्यवस्था को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने की दिशा में बरेली पुलिस के प्रयासों का असर अब आंकड़ों में भी दिखाई देने लगा है। शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया सरल होने और हर स्तर पर सुनवाई सुनिश्चित किए जाने के कारण जनपद उत्तर प्रदेश में एफआईआर दर्ज करने के मामले में लगातार पहले स्थान पर बना हुआ है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बढ़ी हुई एफआईआर संख्या अपराध बढ़ने का संकेत नहीं, बल्कि शिकायतों के त्वरित पंजीकरण और प्रभावी पुलिसिंग का परिणाम है।

पुलिस विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 और वर्ष 2026 में अब तक कुल 28,090 मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इनमें वर्ष 2025 में 19,585 और वर्ष 2026 में अब तक 8,505 एफआईआर पंजीकृत हुई हैं। दोनों वर्षों में बरेली प्रदेश में सबसे अधिक एफआईआर दर्ज करने वाला जिला रहा।

वर्ष 2025 में एफआईआर दर्ज करने के मामले में गोरखपुर दूसरे और अलीगढ़ तीसरे स्थान पर रहे। वहीं वर्ष 2026 में अब तक अलीगढ़ दूसरे तथा बुलंदशहर तीसरे स्थान पर है।

एफआईआर पंजीकरण की प्रक्रिया आसान होने के साथ ही झूठी और तथ्यों से परे शिकायतों की संख्या भी बढ़ी है। ऐसे मामलों में पुलिस जांच के बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई कर रही है। पिछले लगभग डेढ़ वर्ष में 6,602 मामलों में फाइनल रिपोर्ट (एफआर) दाखिल की गई या मुकदमों को एक्सपंज किया गया। वर्ष 2025 में 4,737 मामलों में एफआर और 82 मामलों में एक्सपंज की कार्रवाई हुई, जबकि वर्ष 2026 में अब तक 1,739 मामलों में एफआर तथा 82 मुकदमे एक्सपंज किए जा चुके हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अब फरियादियों को पुलिस चौकी, थाना, क्षेत्राधिकारी, अपर पुलिस अधीक्षक और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय तक अपनी शिकायत दर्ज कराने में पहले की तुलना में अधिक सुविधा मिल रही है। इसके अलावा यूपी कॉप ऐप, ऑनलाइन एफआईआर, जीरो एफआईआर की व्यवस्था और अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान भी मुकदमों की संख्या बढ़ने के प्रमुख कारण हैं।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्य ने कहा कि जनसुनवाई को प्रत्येक स्तर पर सरल और सुलभ बनाने के लिए लगातार प्रयास किए गए हैं। इसी का परिणाम है कि लोगों को बिना अनावश्यक परेशानी के एफआईआर दर्ज कराने की सुविधा मिल रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुकदमों की संख्या बढ़ने का अर्थ अपराध बढ़ना नहीं है, बल्कि शिकायतों के तत्काल पंजीकरण और अपराधियों के विरुद्ध समयबद्ध कानूनी कार्रवाई के कारण यह स्थिति बनी है। गैंगस्टर अधिनियम सहित विभिन्न विशेष अभियानों के दौरान दर्ज मुकदमों का भी इन आंकड़ों में महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

Saurabh Gupta
Author: Saurabh Gupta