होली पर सख्ती की मांग: ‘क्रिमिनल एक्शन’ बनते त्योहार को बचाने की अपील

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होली पर सख्ती की मांग: ‘क्रिमिनल एक्शन’ बनते त्योहार को बचाने की अपील

शराब, जहरीले रंग और जल प्रदूषण पर प्रतिबंध की उठी आवाज

2026 से होली से पहले ‘हिरण्यकश्यप-प्रह्लाद लीला’ मंचन का प्रस्ताव

रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता 

बरेली। देश में बढ़ते अपराध और त्योहारों पर बढ़ती अराजकता को लेकर ‘गरीब शक्ति दल’ ने होली पर्व को लेकर बड़ा सवाल उठाया है। संगठन ने आरोप लगाया है कि प्राचीन धार्मिक परंपरा का प्रतीक रहा होली का त्योहार अब “होली क्रिमिनल एक्शन” का रूप लेता जा रहा है।

संगठन के पदाधिकारियों ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन बरेली के जिलाधिकारी को सौंपते हुए मांग की कि होली पर शराब की बिक्री, जहरीले रासायनिक रंगों का उपयोग और जल प्रदूषण पर कड़ा प्रतिबंध लगाया जाए।

वैदिक परंपरा से ‘हुड़दंग’ तक?

संगठन प्रमुख मनोज विकट ने कहा कि भारत में होली की परंपरा वैदिक काल से चली आ रही है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है, जिसकी मूल कथा हिरण्यकश्यप और प्रह्लाद से जुड़ी है।

इसके साथ ही ब्रज क्षेत्र में राधा-कृष्ण की लीलाओं के रूप में होली प्रेम और उल्लास का प्रतीक रही है।

उन्होंने कहा कि समय के साथ इस पर्व की मर्यादाएं टूट रही हैं। शराब के नशे में हुड़दंग, जबरन रंग लगाना, कीचड़ व गोबर फेंकना, तेज डीजे बजाना और महिलाओं के साथ अभद्रता जैसी घटनाएं त्योहार की पवित्रता को आहत कर रही हैं।

शराब और घातक रंगों पर प्रतिबंध की मांग

संगठन का कहना है कि होली के दौरान खुलेआम शराब का सेवन और रासायनिक रंगों का प्रयोग स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। त्वचा रोग, आंखों में जलन, एलर्जी, अस्थमा और जल स्रोतों के प्रदूषण जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि त्योहार की आड़ में कई बार आपराधिक घटनाएं और व्यक्तिगत दुश्मनी निकालने की कोशिशें भी सामने आती हैं। संगठन ने मांग की कि इस दौरान विशेष निगरानी व्यवस्था लागू की जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।

रामलीला की तर्ज पर हो ‘प्रह्लाद लीला’ का मंचन

गरीब शक्ति दल ने केंद्र सरकार से मांग की है कि जिस प्रकार दीपावली से पहले देशभर में रामलीला का आयोजन होता है, उसी प्रकार 2026 से होली से पूर्व सभी जिलों में ‘हिरण्यकश्यप-प्रह्लाद लीला’ का मंचन अनिवार्य किया जाए।

संगठन का मानना है कि इससे नई पीढ़ी को त्योहार के वास्तविक धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व की जानकारी मिलेगी तथा समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा।

ज्ञापन सौंपने वालों में मनोज विकट, गिरीश चंद्र सक्सेना, संजय सक्सेना (एडवोकेट), गगन जैन, संजीव सागर, जगदीश सागर और रेनू जोहरी समेत कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।

संगठन ने प्रधानमंत्री से अपील की है कि होली को उसकी मूल सांस्कृतिक गरिमा के साथ मनाने के लिए ठोस नीति बनाई जाए, ताकि यह पर्व फिर से उल्लास, सद्भाव और आध्यात्मिक संदेश का प्रतीक बन सके।

Saurabh Gupta
Author: Saurabh Gupta