पराविधिक स्वयंसेवकों के लिए क्लस्टर आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम अर्बन हाट सभागार आयोजित
176 पीएलवी ने लिया हिस्सा, मानव तस्करी, पॉक्सो एक्ट व सामाजिक योजनाओं पर मिली जानकारी
बरेली। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बरेली के तत्वावधान में सोमवार को अर्बन हाट सभागार में पराविधिक स्वयंसेवकों हेतु क्लस्टर आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम “संवर्धन” का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ माननीय जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बरेली प्रदीप कुमार सिंह द्वितीय ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया।
कार्यक्रम में हरदोई, पीलीभीत, शाहजहांपुर एवं बरेली के कुल 176 पराविधिक स्वयंसेवक (पीएलवी/अधिकार मित्र) शामिल हुए। हरदोई के अपर जिला जज भूपेन्द्र प्रताप, पीलीभीत के सुनील कुमार द्वितीय, शाहजहांपुर के ओमप्रकाश मिश्रा तृतीय तथा बरेली के अपर जिला जज/सचिव उमाशंकर कहार कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
अपने उद्घाटन संबोधन में जिला जज बरेली ने आशा व्यक्त की कि यह प्रशिक्षण पीएलवी के लिए अत्यंत उपयोगी व ज्ञानवर्धक सिद्ध होगा।
सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण उमाशंकर कहार ने मानव तस्करी की रोकथाम, पॉक्सो एक्ट–2012 तथा संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं पर विस्तृत जानकारी दी। मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. आलोक शुक्ला ने मानसिक रोगों एवं रोगियों की सहायता के उपाय बताए। पीएलवी सुधीर उपाध्याय ने माता–पिता एवं वरिष्ठ नागरिक कल्याण अधिनियम–2007 पर व्याख्यान प्रस्तुत किया।
जिला प्रोबेशन अधिकारी मोनिका राणा ने विभिन्न सामाजिक कल्याण योजनाओं निराश्रित महिला पेंशन, बाल सेवा योजना, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ योजना तथा वन स्टॉप सेंटर की जानकारी विस्तार से दी। वन स्टॉप सेंटर की प्रबंधक चंचल गंगवार ने भी महत्वपूर्ण जानकारियाँ साझा कीं।
तीसरे सत्र में उमाशंकर कहार ने दोबारा पॉक्सो एक्ट को विस्तार से समझाया। कार्यक्रम में रामदत्त, विनीत कुमार सक्सेना, बालेश कुमार मिश्रा, नेहा, व सत्यपाल (पीएलवी) ने भी विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखे।
समापन सत्र में शाहजहांपुर के अफ़ज़ल ने देशभक्ति गीत “ज़िंदगी मौत न बन जाए, संभालो यारों…” प्रस्तुत कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का संचालन सैयद समीर अहमद (लीगल एड डिफेंस काउंसिल) ने किया, जबकि आभार व्यक्त अपर जिला जज उमाशंकर कहार ने किया।