
इस्तीफ़े के बाद बड़ा एक्शन: बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री सस्पेंड, मंडलायुक्त करेंगे जांच
रात 11 बजे खाली किया सरकारी आवास, समर्थकों की भीड़ ने लगाए जय शिवा–जय भवानी के नारे
प्रशासनिक अनुशासन बनाम भावनाएं: अलंकार अग्निहोत्री निलंबित, सियासी घमासान तेज
बरेली से लखनऊ तक हलचल: सिटी मजिस्ट्रेट पर गिरी गाज, यूजीसी नियम और शंकराचार्य विवाद केंद्र मे
रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता
बरेली। गणतंत्र दिवस के दिन इस्तीफ़ा देकर प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मचाने वाले बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री पर अब शासन ने सख़्त कार्रवाई की है। उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की विभागीय जांच के आदेश जारी किए गए हैं। जांच की जिम्मेदारी बरेली मंडल के आयुक्त भूपेंद्र एस. चौधरी को सौंपी गई है।
शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि सिटी मजिस्ट्रेट के पद पर रहते हुए उनके आचरण को प्रथम दृष्टया अनुशासनहीनता की श्रेणी में माना गया है। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली–1999 के तहत की गई है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें केवल जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा, किसी भी प्रकार का अतिरिक्त भत्ता नहीं दिया जाएगा।
आधी रात सरकारी आवास खाली, बरेली में ही ठिकाना
शासन की कार्रवाई के कुछ ही घंटों बाद घटनाक्रम ने और नाटकीय मोड़ ले लिया। अलंकार अग्निहोत्री ने रात करीब 11 बजे अपना सरकारी आवास खाली कर दिया। फिलहाल वे बरेली में ही अपने परिचितों के यहां रुके हुए हैं। आदेश के अनुसार निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय शामली तय किया गया है और बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने पर रोक रहेगी।
डीएम आवास पर बैठक, फिर लगाए गंभीर आरोप
इस्तीफ़ा देने के बाद शाम करीब 7:30 बजे अलंकार अग्निहोत्री जिलाधिकारी अविनाश सिंह के आवास पहुंचे थे। वहां लगभग एक घंटे तक बातचीत चली। बाहर निकलते ही उन्होंने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें 45 मिनट तक बंधक बनाकर रखा गया, लखनऊ से फोन आए और कथित रूप से अपशब्दों का इस्तेमाल हुआ।
हालांकि जिला प्रशासन ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और तथ्यहीन बताते हुए खारिज कर दिया है।
UGC नियम और शंकराचार्य प्रकरण बना विवाद की जड़
अलंकार अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफ़े के पीछे यूजीसी के नए नियमों और प्रयागराज माघ मेले के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों से कथित मारपीट को कारण बताया था। उन्होंने इसे सनातन, ब्राह्मण समाज और साधु-संतों के अपमान से जोड़ा।
इस मुद्दे पर सपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ-साथ कई ब्राह्मण संगठनों ने भी खुलकर समर्थन किया और प्रदर्शन किए।

एडीएम कंपाउंड में उमड़ी भीड़, समर्थन में गूंजे नारे
रात में आवास खाली करने के दौरान एडीएम कंपाउंड में सैकड़ों समर्थकों की भीड़ जमा हो गई। जैसे ही अलंकार अग्निहोत्री कार में बैठकर रवाना हुए, भीड़ ने उनके समर्थन में ‘जय शिवा, जय भवानी’ के नारे लगाए। माहौल पूरी तरह भावनात्मक और उग्र नजर आया।
शासन बनाम संवेदना: टकराव गहराया
एक ओर शासन इसे प्रशासनिक अनुशासन और मर्यादा का सवाल बता रहा है, वहीं दूसरी ओर अलंकार अग्निहोत्री इसे वैचारिक संघर्ष और सामाजिक सम्मान से जोड़ रहे हैं। इस्तीफ़ा, निलंबन, जांच और सड़कों पर उतरा समर्थन—इस पूरे घटनाक्रम ने बरेली से लेकर लखनऊ तक सियासी और सामाजिक बहस को तेज कर दिया है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या यह मामला सिर्फ एक अफसर तक सीमित रहेगा या आगे और बड़े राजनीतिक समीकरण बनेंगे!
