
कैटल जीनोमिक्स समिट 2026 में बीएल एग्रो ने अपने बायोटेक्नोलॉजी व्यवसाय लीड्स जेनेटिक्स में ₹1,500 करोड़ के निवेश की घोषणा की
इंटीग्रेटेड डेयरी और जेनेटिक्स इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम
कार्यक्रम के दौरान भारत के पहले जेनेटिकली सेलेक्टेड एलीट गिर बछड़ों का बरेली में लाइव जन्म हुआ, जो भारत-ब्राजील पशु आनुवंशिकी सहयोग में एक नई उपलब्धि है।
जेनेटिकली सेलेक्टेड गायों से उच्च गुणवत्ता वाले दूध का उत्पादन होने की उम्मीद है, जिसमें प्रति गाय प्रतिदिन औसतन 40–60 लीटर दूध उत्पादन का अनुमान है।
बरेली स्थित लीड्स जेनेटिक्स सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में वर्ष 2027 के अंत तक प्रति माह 15,000 भ्रूण तैयार किए जाएंगे।
रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता
बरेली: भारत के प्रमुख एफएमसीजी ग्रुप बीएल एग्रो ने आज अपनी बायोटेक्नोलॉजी सहायक कंपनी लीड्स जेनेटिक्स में ₹1,500 करोड़ के निवेश की घोषणा की। इस निवेश का उद्देश्य जेनेटिक्स और रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी को इंटीग्रेटेड करते हुए 360-डिग्री सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल विकसित करना है, जिससे देश में पशु प्रजनन और अंततः डेयरी उद्योग में सुधार लाया जा सके। कंपनी इस मॉडल को अन्य राज्यों में भी दोहराने के लिए उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के साथ बातचीत कर रही है। यह घोषणा 14 और 15 सितंबर को बरेली स्थित बीएल कामधेनु फार्म्स में आयोजित दो दिवसीय कैटल जीनोमिक्स समिट 2026 के दौरान की गई।
कंपनी इन राज्यों में एक इंटीग्रेटेड डेयरी और जेनेटिक्स इकोसिस्टम विकसित करने के लिए निवेश करेगी। इसमें इन-हाउस इंटीग्रेटेड ब्रीड इम्प्रूवमेंट फार्म, आईवीएफ–ईटी लेबोरेटरी, मल्टिपल ओव्यूलेशन एम्ब्रियो ट्रांसफर (एमओईटी), पैथोलॉजी लेबोरेटरी और जीनोमिक्स लेबोरेटरी शामिल होंगे। इससे नस्ल सुधार से जुड़ी पूरी वैल्यू चेन को एक ही स्थान पर इंटीग्रेटेड किया जा सकेगा। यह पहल बीएल एग्रो के 360-डिग्री मिल्क वैल्यू चेन के व्यापक विजन का हिस्सा है, जिसमें जेनेटिक्स, ब्रीडिंग, पशु स्वास्थ्य, पोषण, दूध उत्पादन, प्रोसेसिंग और बाजार से जुड़ाव शामिल हैं। इसे किसानों के लिए एक्सटेंशन और आउटरीच कार्यक्रमों का भी समर्थन मिलेगा।
दो दिवसीय यह समिट किसी कॉरपोरेट द्वारा आयोजित अपनी तरह का पहला कार्यक्रम था, जिसमें जीनोमिक्स, आईवीएफ, एडवांस्ड सीक्वेंसिंग, जेनेटिक इवैल्यूएशन और डेटा-आधारित ब्रीडिंग को एक ही मंच पर प्रस्तुत किया गया। इसमें वैज्ञानिकों, पशु प्रजनकों, शोधकर्ताओं और उद्योग जगत से जुड़े स्टेकहोल्डर्स ने भाग लिया। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ला, उत्तर प्रदेश के पशुपालन मंत्री श्री धर्मपाल सिंह और उत्तर प्रदेश के वन, पर्यावरण, प्राणी उद्यान एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अरुण कुमार सक्सेना ने भी भाग लिया।
श्री राजेंद्र शुक्ला, उपमुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश ने कहा, “लीड्स जेनेटिक्स और बीएल एग्रो द्वारा इतने बड़े स्तर पर किया जा रहा कार्य अत्यंत सराहनीय है। मैं इस क्षेत्र में रिसर्च और इनोवेशन को आगे बढ़ाने के लिए डॉ. घनश्याम खंडेलवाल तथा उनकी कंपनियों, बीएल एग्रो और लीड्स जेनेटिक्स के प्रयासों की हृदय से सराहना करता हूँ। भारत में आधुनिक एनिमल जेनेटिक्स, ब्रीडिंग टेक्नोलॉजीज और साइंटिफिक रिसर्च को आगे बढ़ाने पर कंपनी का फोकस देश के डेयरी और लाइवस्टॉक सेक्टर को मजबूत करने की दिशा में एक प्रगतिशील कदम है। यह पहल देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने, प्रोडक्टिविटी बढ़ाने और किसानों की समृद्धि को बढ़ावा देने की क्षमता रखती है।”
कार्यक्रम में प्रदर्शित तकनीकी प्रगति पर टिप्पणी करते हुए श्री धर्मपाल सिंह ने कहा, “कृषि-तकनीक, विशेष रूप से निजी क्षेत्र के नेतृत्व में, भारत की प्रगति को देखना उत्साहजनक है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है, लेकिन प्रति पशु उत्पादकता अभी भी कम है और हाई-एंड जेनेटिक्स के लिए हम अब भी आयातित जर्मप्लाज्म पर निर्भर हैं। लीड्स जेनेटिक्स देश में एलीट बुल्स, भ्रूण और सेक्स्ड सीमेन का उत्पादन कर तथा देशी नस्लों को मजबूत करते हुए आनुवंशिक आत्मनिर्भरता के निर्माण में योगदान दे रही है। दूध उत्पादन में वृद्धि से प्रति लीटर दूध उत्पादन पर मीथेन उत्सर्जन को कम करने में भी मदद मिल सकती है।”
यह कार्यक्रम भारत द्वारा ब्रिक्स की अध्यक्षता और 18वें ब्रिक्स लीडर्स’ समिट की मेजबानी के साथ आयोजित हुआ। इस अवसर पर लीड्स जेनेटिक्स में पहले ज़ेबू-ऑप्टिमाइज़्ड बोवाइन एसएनपी चिप के आगमन और इल्युमिना नोवासी़क एक्स प्लेटफॉर्म पर नेक्स्ट-जेनरेशन सीक्वेंसिंग का लाइव प्रदर्शन भी किया गया। ये सभी उपलब्धियां भारत-ब्राजील पशु आनुवंशिकी साझेदारी को जमीनी स्तर पर लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं, जिसे ब्रासीलिया में हुए एक समझौते के माध्यम से औपचारिक रूप दिया गया था।
जीनोमिक चिप लीड्स जेनेटिक्स को हजारों आनुवंशिक मार्करों के आधार पर किसी पशु के डीएनए का आकलन करने में सक्षम बनाती है। इससे जीनोमिक एस्टीमेटेड ब्रीडिंग वैल्यूज़ के माध्यम से अधिक सटीक चयन में मदद मिलती है। पारंपरिक ब्रीडिंग के विपरीत, जिसमें एक पीढ़ी में एक बार सुधार होता है और इसमें दशकों लग सकते हैं, जीनोमिक चिप तकनीक ऐसे पशुओं की शुरुआती पहचान संभव बनाती है, जिनमें दूध उत्पादन, प्रजनन क्षमता, विकास, स्वास्थ्य, गर्मी सहन करने की क्षमता तथा टिक और परजीवियों के प्रति प्रतिरोध जैसे गुणों की बेहतर क्षमता होती है। यह पहचान पारंपरिक प्रोजेनी डेटा उपलब्ध होने से पहले भी की जा सकती है। आईवीएफ, भ्रूण स्थानांतरण और सेक्स-सॉर्टेड सीमेन के साथ मिलकर यह तकनीक पारंपरिक तरीकों की तुलना में बेहतर आनुवंशिकी को कहीं अधिक तेजी से बढ़ाने और फैलाने में मदद करेगी तथा भारतीय जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल पशुधन आबादी विकसित करने की दिशा में काम करेगी।
बीएल एग्रो के चेयरमैन डॉ. घनश्याम खंडेलवाल ने कहा, “किसान हमारे 360-डिग्री सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल के केंद्र में हैं। बेहतर जेनेटिक्स से दूध उत्पादन, प्रजनन क्षमता और पशुओं के दीर्घकालिक मूल्य में सुधार किया जा सकता है, साथ ही किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर भी पैदा किए जा सकते हैं। जेनेटिकली सेलेक्टेड गायों से उच्च गुणवत्ता वाले दूध का उत्पादन होने की उम्मीद है, जिसमें प्रति गाय प्रतिदिन औसतन 40–60 लीटर दूध उत्पादन का अनुमान है। इससे किसानों की आय के स्रोतों में सुधार होगा। हमारा मानना है कि लीड्स जेनेटिक्स में किया गया रणनीतिक निवेश क्षमता निर्माण, वैज्ञानिक डेयरी प्रथाओं में सुधार और ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने में मदद करेगा।”
लीड्स जेनेटिक्स के सह-संस्थापक डॉ. आशीष दुबे ने कहा, “हमें नवीनतम तकनीकों को प्रदर्शित करने का अवसर मिलने पर गर्व है। यह स्वदेशी जीनोमिक क्षमता विकसित करने और उष्णकटिबंधीय परिस्थितियों में पशु प्रजनन को मजबूत करने की हमारी प्रतिबद्धता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हमारा उद्देश्य एलीट पशुओं से प्राप्त उन्नत जेनेटिक्स के लाभों को किसानों और अंततः भारत की व्यापक पशुधन आबादी तक पहुंचाना है। जीनोमिक्स हमें आनुवंशिक क्षमता की अधिक सटीक पहचान करने और केवल पारंपरिक चयन पर निर्भर रहने के बजाय मापनीय गुणों के आधार पर ब्रीडिंगप्रोग्राम तैयार करने में सक्षम बनाता है। डेयरी का भविष्य केवल बेहतर पोषण और प्रबंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि बेहतर जेनेटिक्स भी उतना ही महत्वपूर्ण है।”
लीड्स जेनेटिक्स के वीपी ऑपरेशंस डॉ. एस.के. अग्रवाल ने कहा, “इन जेनेटिकली सेलेक्टेड एलीट गिर बछड़ों का लाइव जन्म एक मजबूत स्वदेशी ब्रीडिंग प्रोग्राम के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हमारा ध्यान उन्नत जेनेटिक्स को वैज्ञानिक फार्म मैनेजमेंट के साथ जोड़ने पर है, ताकि भारतीय पशुओं की उत्पादकता, प्रजनन क्षमता और प्रतिकूल परिस्थितियों में अनुकूलन क्षमता में सुधार किया जा सके।”
लीड्स जेनेटिक्स के हेड – आईवीएफ- एमओईटी, डॉ. सरवन्नन दुरैराज ने कहा, “हमारा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस उन्नत भ्रूण उत्पादन तकनीकों को बड़े पैमाने पर लागू करने और बेहतर जेनेटिक्स को अधिक व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित किया जा रहा है। हमारा लक्ष्य वर्ष 2027 के अंत तक प्रति माह 15,000 भ्रूणों का उत्पादन करना है। इससे भारत के डेयरी क्षेत्र में आनुवंशिक सुधार की प्रक्रिया को तेज करने के लिए आवश्यक क्षमता विकसित होगी।”
लीड्स जेनेटिक्स की पहल का उद्देश्य आयात लागत के एक अंश पर देश में ही एलीट बुल्स, भ्रूण और सेक्स्ड सीमेन का उत्पादन करना है। इसके साथ ही कंपनी भारत की स्वदेशी नस्लों को समाप्त करने के बजाय उनके संरक्षण और सुधार पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है। अंततः इसका उद्देश्य केवल व्यक्तिगत पशुओं की जेनेटिक्स में सुधार करना नहीं, बल्कि एक अधिक मजबूत, उत्पादक और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भारतीय डेयरी क्षेत्र का निर्माण करना है।
