
डॉक्टर की मौत के बाद मिला अस्पताल का लाइसेंस! पीलीभीत के स्वास्थ्य विभाग में फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा
मृत डॉक्टर के नाम पर चल रहा अस्पताल, झोलाछापों के हवाले मरीजों की जिंदगी
CMO कार्यालय पर उठे सवाल: दिवंगत डॉक्टर के नाम पर रजिस्ट्रेशन, जांच के घेरे में पीलीभीत का स्वास्थ्य विभाग
पीलीभीत में स्वास्थ्य विभाग का बड़ा खेल! कागजों में जिंदा रहा डॉक्टर, अस्पताल को मिल गई मंजूरी
मौत के बाद भी डॉक्टर ‘कागजों में जिंदा’, अस्पताल को मिल गया रजिस्ट्रेशन; झोलाछापों के हवाले मरीजों की जिंदगी
रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता
बरेली/पीलीभीत। पीलीभीत जिले के बीसलपुर से स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि एक निजी अस्पताल का पंजीकरण ऐसे डॉक्टर के नाम पर स्वीकृत कर दिया गया, जिनका निधन कई वर्ष पहले हो चुका था। हैरानी की बात यह है कि अस्पताल के पंजीकरण से पहले डॉक्टर के भौतिक सत्यापन और दस्तावेजों की पुष्टि जैसी अनिवार्य प्रक्रिया पूरी किए बिना ही फाइल को मंजूरी दे दी गई। अब इस अस्पताल में कथित तौर पर अप्रशिक्षित और झोलाछाप लोग मरीजों का इलाज कर रहे हैं, जिससे मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं।

👆फर्जी अस्पताल का अनट्रेंड स्टाफ👆

👆फर्जी अस्पताल मे भर्ती मरीज👆

👆फर्जी डॉक्टर फर्जी अस्पताल बगैर बीमारी के मरीज का इलाज करते हुआ👆
जानकारी के अनुसार, अस्पताल के पंजीकरण की प्रक्रिया में जिन नियमों का पालन किया जाना चाहिए था, उन्हें दरकिनार कर दिया गया। सामान्य तौर पर अस्पताल का लाइसेंस जारी करने से पहले संबंधित चिकित्सक की मौजूदगी, दस्तावेजों की जांच और अन्य औपचारिक सत्यापन किए जाते हैं, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर विभागीय स्तर पर इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई।

👆फर्जी अस्पताल में फर्जी डॉक्टर👆
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में लंबे समय से कथित झोलाछाप चिकित्सक मरीजों का इलाज कर रहे हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल विभागीय लापरवाही का मामला होगा, बल्कि आम लोगों की जान जोखिम में डालने जैसा भी माना जाएगा। मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

👆फोटो : फर्जी अस्पताल में बेचारे भर्ती मरीज👆
सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे प्रकरण में स्वास्थ्य विभाग के तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। चर्चा है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए एडी हेल्थ, बरेली डॉ. सीमा अग्रवाल इस प्रकरण का संज्ञान ले सकती हैं। जांच में यदि किसी स्तर पर अनियमितता या लापरवाही की पुष्टि होती है तो तत्कालीन सीएमओ अथवा संबंधित डिप्टी सीएमओ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

उधर, शनिवार शाम करीब साढ़े चार बजे इस मामले में पक्ष जानने के लिए एडी हेल्थ डॉ. सीमा अग्रवाल से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन वह कार्यालय से जा चुकी थीं। उनका आधिकारिक पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।

फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग में चर्चाओं का दौर तेज है। यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो यह जिले के स्वास्थ्य तंत्र से जुड़े सबसे गंभीर मामलों में से एक साबित हो सकता है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।
👆कार्यालय :👆
डॉक्टर सीमा अग्रवाल (एडी हेल्थ)
अपर निदेशक चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, बरेली मंडल, बरेली उत्तर प्रदेश (एडी हेल्थ)