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“मुझे बचा लो, मैं जीना चाहती हूं…” विधवा की पुकार सुनकर देवदूत बने राजश्री ग्रुप के चेयरमैन “राजेंद्र अग्रवाल”

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“मुझे बचा लो, मैं जीना चाहती हूं…” विधवा की पुकार सुनकर देवदूत बने राजश्री ग्रुप के चेयरमैन “राजेंद्र अग्रवाल”

जब अपनों ने छोड़ा साथ, तब इंसानियत बनकर सामने आए राजेंद्र अग्रवाल 

62 वर्षीय बेसहारा महिला की मदद को बढ़े हाथ, मुफ्त इलाज की व्यवस्था ने जीता सभी का दिल

मानवता की मिसाल: दर्द में तड़प रही वृद्धा को अस्पताल पहुंचाकर बचाई उम्मीद की सांसें

सोशल मीडिया पर हो रही सराहना, जरूरतमंद महिला के लिए मसीहा बने राजेंद्र अग्रवाल

अपनों ने छोड़ा साथ, तो इंसानियत ने थामा हाथ; वृद्ध महिला के लिए मसीहा बने राजेंद्र अग्रवाल

रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता

बरेली। कहते हैं कि इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं होता और जब किसी बेबस की मदद के लिए कोई आगे बढ़ता है, तो वह उसके लिए किसी फरिश्ते से कम नहीं होता। ऐसा ही एक भावुक कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने लोगों के दिलों को छू लिया है।

62 वर्षीय कृष्णा देवी, जो विधवा हैं और जिनका इस दुनिया में कोई सहारा नहीं है, लंबे समय से बीमारी और अकेलेपन से जूझ रही थीं। न संतान, न कोई करीबी रिश्तेदार और न ही देखभाल करने वाला कोई अपना। बीमारी बढ़ने के साथ उनकी स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी।

बेहद दर्द और लाचारी के बीच कृष्णा देवी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मदद की गुहार लगाते हुए कहा, “मुझे बचा लीजिए, मैं जीना चाहती हूं।” उनकी यह पुकार कई लोगों तक पहुंची, लेकिन सबसे पहले संवेदनशीलता दिखाते हुए राजश्री ग्रुप ऑफ कंपनीज के “चेयरमैन राजेंद्र अग्रवाल”  मदद के लिए आगे आए।

मामले की जानकारी मिलते ही उन्होंने बिना देर किए एम्बुलेंस की व्यवस्था करवाई और कृष्णा देवी को राजश्री हॉस्पिटल में भर्ती कराया। इतना ही नहीं, उनके “संपूर्ण उपचार को निःशुल्क कराने” का निर्णय भी लिया गया। अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी और देखभाल कर रही है।

इस मानवीय पहल ने यह साबित कर दिया कि आज भी समाज में ऐसे लोग मौजूद हैं जो दूसरों के दर्द को अपना दर्द समझते हैं। जहां अक्सर लोग अनजान जरूरतमंदों से दूरी बना लेते हैं, वहीं यह कदम समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया है।

सोशल मीडिया पर भी इस मानवीय कार्य की जमकर सराहना हो रही है। लोग इसे मानवता, सामाजिक जिम्मेदारी और संवेदनशील नेतृत्व की मिसाल बता रहे हैं।

यह घटना हम सभी को एक संदेश देती है कि यदि हमारे आसपास कोई वृद्ध, असहाय, बीमार या जरूरतमंद व्यक्ति है तो उसे अकेला न छोड़ें। हमारी छोटी-सी मदद किसी के जीवन में नई उम्मीद जगा सकती है।

क्योंकि आखिरकार, इंसानियत ही वह ताकत है जो किसी की बुझती हुई उम्मीदों में फिर से रोशनी भर सकती है।

“मुझे बचा लो… मैं जीना चाहती हूं!” 💔 जब 62 वर्षीय बेसहारा कृष्णा देवी ने मदद की गुहार लगाई, तब राजश्री ग्रुप ऑफ कंपनीज के चेयरमैन राजेंद्र अग्रवाल उनके लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आए। एम्बुलेंस भेजी, अस्पताल में भर्ती कराया और मुफ्त इलाज की व्यवस्था की।

ऐसी खबरें बताती हैं कि इंसानियत आज भी जिंदा है। ❤️🙏

फोटो : राजश्री ग्रुप ऑफ कंपनीज के चेयरमैन राजेंद्र अग्रवाल

फोटो : राजश्री ग्रुप ऑफ़ इंस्टिट्यूशन & हॉस्पिटल 

Saurabh Gupta
Author: Saurabh Gupta