ईद-उल-फितर पर बरेली में दिखा भाईचारे का रंग, ईदगाह से मस्जिदों तक गूंजती रही तकबीर

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ईद-उल-फितर पर बरेली में दिखा भाईचारे का रंग, ईदगाह से मस्जिदों तक गूंजती रही तकबीर

रोजों का इनाम: ईद पर नमाज़, गले मिलकर मुबारकबाद और अमन की दुआ

बरेली में अदा हुई ईद की नमाज़, मुल्क की तरक्की और फिलिस्तीन के लिए मांगी दुआ

रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता 

बरेली। ईद-उल-फितर का त्योहार शहर भर में पूरे उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। सुबह होते ही बच्चे, बुजुर्ग और युवा नए कपड़ों में सज-धज कर मस्जिदों और ईदगाह की ओर निकल पड़े। रमजान के पूरे महीने इबादत के बाद ईद की नमाज़ अदा कर लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर मुबारकबाद दी और खुशियां साझा कीं।

शहर की मुख्य नमाज़ बाकरगंज स्थित ईदगाह में सुबह 10:30 बजे अदा की गई, जहां बड़ी संख्या में नमाजियों ने शिरकत की। नमाज़ के बाद खुत्बा पढ़ा गया और देश की तरक्की, अमन-चैन के साथ-साथ फिलिस्तीन और मस्जिद-ए-अक्सा की हिफाजत के लिए खास दुआ की गई।

इमामों ने अपने संदेश में कहा कि ईद, रमजान के 30 रोजों का इनाम है और जिस तरह लोगों ने पूरे महीने बुराइयों से खुद को दूर रखा, उसी तरह आगे भी नेक राह पर चलने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ईद खुशी का दिन है, लेकिन आत्ममंथन का भी मौका है।

शहर की प्रमुख दरगाहों और मस्जिदों—जैसे दरगाह वली मियां, दरगाह ताजुश्शरिया, शाह शराफत मियां, खानकाह-ए-नियाजिया, जामा मस्जिद समेत अन्य स्थानों पर भी तय समय पर नमाज़ अदा की गई। रज़ा मस्जिद में सुबह 11 बजे नमाज़ के बाद दुनिया में अमन और भाईचारे के लिए दुआ की गई।

नमाज़ के बाद लोग कब्रिस्तानों में पहुंचकर अपने पूर्वजों के लिए फातिहा पढ़ते नजर आए। इसके बाद घरों में दावतों का सिलसिला शुरू हुआ। बच्चों को ईदी दी गई और पूरे दिन शहर में खुशी और भाईचारे का माहौल बना रहा।

ईदगाह और अन्य स्थानों पर नमाज़ की व्यवस्था स्थानीय कमेटियों द्वारा संभाली गई। इस दौरान शहर के कई गणमान्य लोग भी मौजूद रहे और उन्होंने लोगों को ईद की बधाई देते हुए आपसी सौहार्द बनाए रखने की अपील की।

Saurabh Gupta
Author: Saurabh Gupta