
क्या भारत का बेटा था ईरान के खुमेनी? सर्वोच्च नेता का बाराबंकी से रिश्ता, बाराबंकी के किंतूर गांव में पसरा मातम
भारत की मिट्टी से जुड़ा था खुमैनी परिवार, खबर मिलते ही सन्न रह गया किंतूर
बाराबंकी के किंतूर का ईरान से ऐतिहासिक नाता, ‘हिंदी’ उपनाम से जुड़ी पहचान
भारत की सरज़मीं से जुड़ा था ईरान का बड़ा नाम, किंतूर गांव में छाया सन्नाटा
रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता
बाराबंकी। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले की सिरौली गौसपुर तहसील स्थित किंतूर गांव इन दिनों अचानक चर्चा में है। इसकी वजह ईरान की 1979 की इस्लामी क्रांति के जनक और पहले सर्वोच्च नेता Ayatollah Ruhollah Khomeini से जुड़ा ऐतिहासिक संबंध है।
बताया जाता है कि खुमैनी के दादा सैयद अहमद मूसवी मूल रूप से किंतूर गांव के निवासी थे। वह 19वीं सदी के आसपास अवध के नवाब के साथ यात्रा पर निकले और बाद में ईरान के खुमैन शहर में बस गए। परिवार ने अपनी जड़ों की पहचान बनाए रखने के लिए अपने नाम के साथ ‘हिंदी’ उपनाम भी जोड़ा था।
‘सैयद वाड़ा’ आज भी देता है गवाही
गांव के बुजुर्गों के मुताबिक, किंतूर में आज भी ‘सैयद वाड़ा’ नाम से एक इलाका जाना जाता है, जहां खुमैनी परिवार के वंशज काजमी बिरादरी के लोग रहते हैं। कुछ पुराने दस्तावेज और पुश्तैनी मकानों के अवशेष इस ऐतिहासिक रिश्ते की याद दिलाते हैं।
स्थानीय निवासी सैय्यद निहाल मियां ने नम आंखों से कहा कि यह सिर्फ एक देश का नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए क्षति है। उनके अनुसार, लोग उन्हें एक बड़े धार्मिक और राजनीतिक व्यक्तित्व के रूप में देखते थे।
इतिहास में दर्ज है ‘भारतीय मूल’ का जिक्र
इतिहास के जानकार बताते हैं कि 1978 में जब ईरान में शाह का शासन था, तब विरोधियों ने खुमैनी को ‘भारतीय मूल का मुल्ला’ कहकर उनकी छवि को प्रभावित करने की कोशिश की थी। हालांकि, यह दांव उल्टा पड़ा और इससे उनकी लोकप्रियता में इजाफा ही हुआ।
गांव के डॉ. रेहान काजमी ने इसे “इतिहास का दर्दनाक क्षण” बताया। उनका कहना है कि गांव के लोग आज भी अपने पुराने रिश्तों और इस ऐतिहासिक जुड़ाव को याद कर रहे हैं।
सोशल मीडिया से गांव तक पहुंची खबर
जैसे ही सोशल मीडिया और टीवी चैनलों के माध्यम से खबर गांव पहुंची, लोग घरों में बैठकर घटनाक्रम पर नजर रखने लगे। किंतूर में असामान्य शांति देखी जा रही है। ग्रामीणों के बीच इस ऐतिहासिक संबंध को लेकर चर्चा का दौर जारी है।
कभी शांत रहने वाला यह गांव आज अचानक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम के कारण सुर्खियों में है। किंतूर के लोग इसे अपने इतिहास से जुड़ा भावनात्मक अध्याय मान रहे हैं।