
सदी का सबसे बड़ा फैसला! खुलेगा कोणार्क सूर्य मंदिर का बंद गर्भगृह? जाने कैसे……
120 साल बाद खुलेगा कोणार्क का रहस्यमयी गर्भगृह?
ASI का ऐतिहासिक मिशन — सदी पुराना राज क्या अब आएगा सामने!
भारत की सांस्कृतिक विरासत में नया अध्याय, कोणार्क मंदिर में होगा इतिहास रचने वाला पल!
एक्सक्लुसिव रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता
बरेली! ओडिशा के पुरी के पास स्थित 13वीं शताब्दी का ऐतिहासिक कोणार्क सूर्य मंदिर एक बार फिर सुर्खियों में है। लगभग एक सदी से बंद पड़ा इसका गर्भगृह अब खुलने की दिशा में बढ़ रहा है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने मंदिर के अंदर भरी गई रेत को वैज्ञानिक तरीके से हटाने का ऐतिहासिक अभियान शुरू कर दिया है।
अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो आने वाले एक साल में श्रद्धालु पहली बार इस भव्य मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश कर सकेंगे।

आखिर क्यों भरी गई थी गर्भगृह में रेत?
साल 1903-04 में अंग्रेज अधिकारियों ने मंदिर के मुख्य कक्ष (जगमोहन हॉल) में हजारों टन रेत भरवा दी थी। उस समय मंदिर की दीवारों में दरारें आने लगी थीं और ढांचा गिरने का खतरा बढ़ गया था।
संरचना को बचाने के लिए पीछे 15 फीट ऊंची दीवार बनाई गई और गर्भगृह को पूरी तरह बंद कर दिया गया। उस दौर में यह फैसला संरक्षण के लिहाज से जरूरी माना गया था।
लेकिन अब 120 साल बाद हालात बदल चुके हैं। रेत नीचे धंस चुकी है और अंदर की संरचना की वास्तविक स्थिति जानना बेहद जरूरी हो गया है।

कैसे चल रहा है ASI का सबसे बड़ा मिशन?
यह काम साधारण नहीं है। 127 फीट ऊंचे मंदिर में 80 फीट की ऊंचाई पर ‘जीरो वाइब्रेशन’ तकनीक से डायमंड ड्रिलिंग की जा रही है।
✔ 8.5 मीटर लंबा और 160 मिमी चौड़ा सैंपल निकाला गया
✔ रेत और पत्थर की जांच के लिए IIT मद्रास भेजा गया
✔ 3D लेजर स्कैनिंग से पूरे ढांचे का डिजिटल अध्ययन
✔ 40 हाई-प्रिसिजन सेंसर हर पल संरचना की निगरानी कर रहे हैं

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर पूरी रेत एक साथ हटा दी गई तो पत्थरों के खिसकने का खतरा हो सकता है। इसलिए काम चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है।
अंदर की हालत जानना क्यों जरूरी है?
जांच में सामने आया है कि कुछ हिस्सों में झुकाव और सूक्ष्म दरारें मौजूद हैं। रेत करीब 4-5 फीट तक धंस चुकी है।
यदि समय रहते कदम नहीं उठाया जाता, तो यह असंतुलन भविष्य में बड़े नुकसान का कारण बन सकता था। यही वजह है कि पहले संरचना को मजबूत किया जा रहा है, फिर रेत हटाई जाएगी।

🌞 कोणार्क सूर्य मंदिर: स्थापत्य का अद्भुत चमत्कार
13वीं सदी में गंग वंश के राजा नरसिंहदेव प्रथम ने इस भव्य मंदिर का निर्माण कराया था। इसे सूर्य देव के रथ के रूप में डिजाइन किया गया।
🚩 मंदिर में 24 विशाल पहिए — जिन्हें दिन के 24 घंटों का प्रतीक माना जाता है
🚩 सामने बने 7 घोड़े — सप्ताह के सात दिनों का प्रतिनिधित्व
🚩 खोंडालाइट और लैटराइट पत्थरों का अद्भुत संयोजन
समुद्री यात्रियों ने कभी इसे “ब्लैक पगोडा” कहा, क्योंकि यह दूर से काले रंग की विशाल संरचना की तरह दिखाई देता था।
1984 में इसे यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल घोषित किया। हर साल यहां 35 लाख से ज्यादा पर्यटक आते हैं।
यह सिर्फ मंदिर नहीं, हमारी विरासत है
कोणार्क सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान है। इसकी दीवारों पर उकेरी गई मूर्तियां उस दौर की कला, जीवनशैली और सामाजिक सोच की कहानी कहती हैं।
हजारों लोगों की आजीविका इस पर्यटन से जुड़ी है। ऐसे में इसका संरक्षण केवल धार्मिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय जिम्मेदारी भी है।
क्या सच में खुलेगा गर्भगृह?
IIT मद्रास की रिपोर्ट आने के बाद रेत हटाने की पूरी प्रक्रिया शुरू होगी। अगर सब कुछ सुरक्षित रहा, तो लगभग एक साल के भीतर गर्भगृह के द्वार श्रद्धालुओं के लिए खोले जा सकते हैं।
यदि यह अभियान सफल रहा, तो यह ASI के इतिहास का सबसे बड़ा संरक्षण कार्य माना जाएगा
