दीयों की रोशनी से बदलेगी किस्मत: कैंट बोर्ड ने थामा कुम्हारों का हाथ

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दीयों की रोशनी से बदलेगी किस्मत: कैंट बोर्ड ने थामा कुम्हारों का हाथ

‘वोकल फॉर लोकल’ को मिला नया बल, कुम्हार परिवार के घर पहुंची कैंट टीम

मिट्टी से उम्मीद तक: स्थानीय कारीगरों के समर्थन में आगे आया कैंट बोर्ड

धूप में सूखते दीये, उम्मीदों को सहारा: कैंट प्रशासन की सराहनीय पहल

मिट्टी के दीयों में जगी नई आस: कारीगरों के बीच पहुंचीं कैंट बोर्ड  की सीईओ तनु जैन 

रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता

बरेली। पारंपरिक कला और स्थानीय हस्तशिल्प को बढ़ावा देने की दिशा में गुरुवार को एक सकारात्मक कदम देखने को मिला, जब Bareilly Cantonment Board की टीम शहर के एक कुम्हार परिवार के घर पहुंची। अधिकारियों ने वहां बन रहे मिट्टी के दीयों और अन्य मृद्भांडों के निर्माण कार्य का बारीकी से अवलोकन किया और कारीगरों से सीधे संवाद स्थापित किया।

सीमित साधन, असीम मेहनत

निरीक्षण के दौरान टीम ने देखा कि बेहद सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार बड़ी संख्या में दीये तैयार कर रहा है। आंगन में कतारबद्ध धूप में सूखते दीये और पूरे परिवार की मेहनत ने अधिकारियों को प्रभावित किया। मिट्टी गूंथने से लेकर आकार देने और सुखाने तक की पूरी प्रक्रिया को समझा गया।

कारीगरों ने रखीं समस्याएं

अधिकारियों ने मौके पर ही कारीगरों से उनकी प्रमुख दिक्कतों के बारे में बातचीत की। कारीगरों ने बताया कि उन्हें बाजार तक सीधी पहुंच नहीं मिल पाती, कच्चे माल की कीमतें बढ़ रही हैं और आर्थिक स्थिति भी चुनौतीपूर्ण है।

इस दौरान कैंट बोर्ड की सीईओ Tanu Jain ने आश्वस्त किया कि आने वाले मेलों, प्रदर्शनियों और सामुदायिक आयोजनों में स्थानीय कारीगरों को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि उन्हें बेहतर मंच और खरीदार मिल सकें।

‘वोकल फॉर लोकल’ को जमीनी समर्थन

बोर्ड प्रतिनिधियों ने कहा कि पारंपरिक शिल्पकला सिर्फ रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है। स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने से न केवल कारीगरों को संबल मिलेगा, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की सोच को भी मजबूती मिलेगी।

यह पहल कारीगरों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है। अगर प्रशासन और समाज मिलकर स्थानीय शिल्पकारों का साथ दें, तो मिट्टी के ये छोटे-छोटे दीये हजारों घरों में रोशनी के साथ-साथ कारीगरों के जीवन में भी उजाला भर सकते हैं।

आप भी बनें बदलाव का हिस्सा

इस त्योहार पर स्थानीय कारीगरों से दीये और हस्तशिल्प खरीदें, और ‘वोकल फॉर लोकल’ को सच में सफल बनाएं।

Saurabh Gupta
Author: Saurabh Gupta