गौ ब्राह्मण सन्त रक्षा के लिए भगवान अवतार लेते है आचार्य श्याम बिहारी चतुर्वेदी

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गौ ब्राह्मण सन्त रक्षा के लिए भगवान अवतार लेते है आचार्य श्याम बिहारी चतुर्वेदी

रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता 

बरेली! बरेली के राजेंद्र नगर स्थित बांके बिहारी मंदिर में चल रही भागवत कथा के, चतुर्थ दिवस में, वृंदावन धाम से पधारे आचार्य श्याम बिहारी चतुर्वेदी ने भगवान के जन्म का प्रकाश डालते हुए बताया, भगवान का अवतार ब्राह्मण संत सनातन धर्म की रक्षा के लिए अवतार होता है, उन्होंने बताया जब पृथ्वी पर आतंक अत्याचार अनाचार ब्राह्मणों का तिरस्कार गायों के लिए कष्ट सनातन धर्म पर प्रहार होता है, तब पृथ्वी गाय का स्वरूप बनाकर के भगवान ब्रह्मा के पास पहुंचती है, ब्रह्मा से कहती है, मेरे ऊपर अधर्म का प्रभाव ज्यादा हो रहा है, जितने भी अधर्मी हैं दिन प्रतिदिन अत्याचार अनाचार कर रहे हैं, जिसके कारण मे उन पापियों का भार बोझ सहन नहीं होता, आप मेरा उद्धार करें, ब्रह्मा ने विष्णु से कहा, पृथ्वी इस समय पीड़ा में है, उसकी पीड़ा के लिए आप कुछ उपाय करें ,भगवान नारायण ने कहा ब्रह्मा पृथ्वी से कह दो, मेरा अवतार बृज मंडल में होने वाला है , मेरा यह अवतार संत गौ ब्राह्मण सनातन धर्म की रक्षा के लिए हो रहा है ,जितने भी पाप आत्मा है सबका वध कर डालेंगे, सनातन धर्म की स्थापना करेंगे, ब्रह्मा से कहा जितने भी देवता हैं ,उन सब से कह दीजिए ,ब्रज मंडल में जन्म ले लें ,क्योंकि मेरा अवतार होने वाला है ,ब्रह्मा जी ने सभी देवताओं को बताया कि भगवान का अवतार होने वाला है, भगवान का अवतार वासुदेव और देवकी की अष्टम संतान के रूप में हुआ, भगवान का जन्म भाद्रपद मास की अष्टमी तिथि को रात्रि के ठीक 12:00 बजे जेल के अंदर भगवान का अवतार हुआ, अवतार लेने के बाद भगवान ने वासुदेव जी को बताया आपने तपस्या करी थी, मैं आपके यहां पुत्र रूप में अवतार लिया, अब हम जब छोटे बन जाएंगे, तो आप हमको गोकुल में छोड़कर के आना ,नंद जी के यहां वहां एक कन्या हुई है, उसको लेकर के आना इसके बाद आगे की लीला हम खुद कर लेंगे, वासुदेव जी ने जन्म के बाद स्तुति मैया देवकी ने स्तुति की देवताओं ने स्तुति की है ,वासुदेव जी भगवान को मथुरा से गोकुल नंद के यहां लेकर के गए ,वहां से कन्या को लेकर के आए, पहरेदार भगवान के ले जाने पर सो गए थे ,लेकिन कन्या के आने पर पहरेदारी जाग गए ,हथकड़ियां बेड़िया लग गई, सब लोग कहने लगे आठवां हो गया ,कंस दौड़ा दौड़ा आया कन्या को देखकर की आश्चर्य में पड़ गया , देवताओं ने तो कहा था, आठवां बालक होगा, लेकिन यह तो कन्या है, लेकिन छोड़ना नहीं चाहिए ,कन्या को जैसे ही हाथ से लिया, कन्या अष्टभुजी देवी बनाकर के पादप प्रहार करके कंस से कहती है, ये कंस तू मुझे क्या मारेगा, तेरा करने वाला, इस ब्रजमंडल में जन्म ले चुका है ,इतना कहकर देवी अष्टभुजी विंध्याचल पर्वत पर जाकर के विराजमान हो चुकी , कंस सोचने लगा कैसे विचार करने लगा, उन्हीं श्री कृष्ण दुष्टों और आतंक का अंत कर ,सनातन धर्म की रक्षा के लिए गायों और ब्राह्मणों की रक्षा के लिए अवतार होता है, सनातन धर्म की ध्वजा पताका को फैलाया है, और हम सबका भी कर्तव्य है, इस मौके पर बहुत से श्रोता जान पधारे हैं, जिसमें भजन गायक जगदीश भाटिया, दीपक , गीता, विनोद, विनीता ,रजत खंडेलवाल, आयुष सिंह सोनम, सीमा ,राघवेंद्र बहुत से श्रोता कथा सुनने पहुंच रहे हैं

Saurabh Gupta
Author: Saurabh Gupta