
700 किमी का एक्सप्रेसवे बदलेगा बरेली का भूगोल, 68 गांवों की जमीन होगी अधिग्रहित
पूर्वांचल से पश्चिम यूपी तक रफ्तार का रास्ता, नवाबगंज-बहेड़ी के गांवों में मुआवजे की चर्चा तेज
गोरखपुर से शामली तक ग्रीनफील्ड कॉरिडोर, बरेली मंडल में भूमि अधिग्रहण की तैयारी
विकास की दौड़ या खेती पर चोट? एक्सप्रेसवे से 68 गांवों में बढ़ी हलचल
पूर्व से पश्चिम तक रफ्तार का नया कॉरिडोर, बरेली के 68 गांवों पर पड़ेगा असर
रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता
बरेली। पूर्वांचल को पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जोड़ने के लिए प्रस्तावित करीब 700 किलोमीटर लंबा गोरखपुर-शामली ग्रीनफील्ड लिंक एक्सप्रेसवे अब आकार लेने लगा है। प्रारंभिक सर्वे के बाद तय रूट के मुताबिक यह परियोजना बरेली के 68 गांवों से होकर गुजरेगी। इनमें नवाबगंज और बहेड़ी तहसील के 34-34 गांव शामिल बताए जा रहे हैं।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के लिए सक्षम प्राधिकारी (काला) के चयन की कवायद जारी है। जैसे ही नाम तय होंगे, जमीन का सीमांकन और अधिग्रहण की कार्रवाई औपचारिक रूप से शुरू कर दी जाएगी। गांवों में इसकी आहट से हलचल बढ़ गई है। किसान अपनी-अपनी जमीन के रकबे और संभावित मुआवजे को लेकर जानकारी जुटा रहे हैं।


तीन जिलों में भी होगा अधिग्रहण
बरेली मंडल के साथ-साथ शाहजहांपुर, पीलीभीत और लखीमपुर जिले भी इस परियोजना से प्रभावित होंगे। संबंधित जिलों में एडीएम स्तर के अधिकारियों को भूमि अधिग्रहण की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि लखीमपुर में एसडीएम स्तर से प्रक्रिया संचालित किए जाने की तैयारी है। प्रारंभिक सर्वे की रिपोर्ट एनएचएआई द्वारा जिला प्रशासन को उपलब्ध कराई जा चुकी है और फाइलों की आवाजाही तेज हो गई है।
प्रस्तावित मार्ग गोरखपुर से शुरू होकर बस्ती, अयोध्या, लखनऊ, सीतापुर, लखीमपुर, पीलीभीत के बीसलपुर और शाहजहांपुर के पुवायां से गुजरते हुए बरेली की नवाबगंज व बहेड़ी तहसील को जोड़ेगा। इसके बाद यह रामपुर, मुरादाबाद, सहारनपुर, मेरठ होते हुए शामली तक पहुंचेगा। इस मार्ग के बनने से पूर्व से पश्चिम तक बिना शहरी जाम में फंसे आवागमन संभव हो सकेगा।
कारोबार को गति, गांवों की तस्वीर बदलेगी
नाथ नगरी बरेली पहले ही लखनऊ और दिल्ली के बीच महत्वपूर्ण कारोबारी केंद्र माना जाता है। उत्तराखंड से निकटता के कारण यहां परिवहन और औद्योगिक गतिविधियां सक्रिय हैं। एक्सप्रेसवे के निर्माण से माल ढुलाई में समय की बचत होगी और निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी।
हालांकि विकास की इस रफ्तार के साथ खेती की जमीन में कमी और गांवों के स्वरूप में बदलाव की आशंका भी जुड़ी है। प्रभावित परिवारों के लिए मुआवजा, पुनर्वास और अन्य सुविधाओं की शर्तें ही इस परियोजना के वास्तविक असर को तय करेंगी। फिलहाल योजना प्रशासनिक स्तर पर तेजी से आगे बढ़ रही है और आने वाले महीनों में जमीनी प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है