
सिंचाई ढांचे को मिलेगी नई मजबूती, 74 करोड़ से ज्यादा की लागत से सात नई ड्रेनों का निर्माण
किसानों को राहत की सौगात: 74 करोड़ से बनेंगी सात नई ड्रेन, 17,500 किमी नालों की सफाई
सिंचाई व्यवस्था को मिलेगा नया संबल, पांच जिलों में ड्रेनेज नेटवर्क का विस्तार
हर खेत तक पानी की दिशा में बड़ा कदम, ड्रेनों के निर्माण और सफाई पर सरकार का फोकस
रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता
लखनऊ। प्रदेश में खेती-किसानी को मजबूती देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने में जुटा है। जल निकासी को दुरुस्त करने, जलभराव की समस्या से राहत दिलाने और खेतों तक पानी की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ड्रेनेज व्यवस्था के विस्तार पर विशेष फोकस किया जा रहा है।
इसी कड़ी में वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान प्रदेश के अलग-अलग जिलों में सात नई ड्रेन परियोजनाओं के निर्माण को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं पर कुल 74.33 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके साथ ही विभाग ने 17,500 किलोमीटर ड्रेनों की सफाई का महत्वाकांक्षी लक्ष्य भी तय किया है, जिससे सिंचाई व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जा सके।
पांच जिलों में बनेंगी सात नई ड्रेन
वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिन जिलों को नई ड्रेनेज परियोजनाओं की सौगात मिली है, उनमें गोण्डा, हापुड़ और मेरठ शामिल हैं, जहां एक-एक नई ड्रेन का निर्माण कराया जाएगा। वहीं बिजनौर और बहराइच में दो-दो ड्रेन परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है।
इन योजनाओं के पूरा होने से संबंधित क्षेत्रों में जल निकासी व्यवस्था मजबूत होगी, जिससे जलभराव की समस्या में कमी आएगी और किसानों को सिंचाई के लिए बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी। यह कदम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘हर खेत को पानी’ के संकल्प को जमीन पर उतारने में भी अहम भूमिका निभाएगा।
मार्च 2026 तक पूरी होगी ड्रेनों की सफाई
बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई व्यवस्था को दुरुस्त बनाए रखने के लिए ड्रेनों की नियमित सफाई पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बाढ़ और लगातार उपयोग के चलते ड्रेनों में गाद और सिल्ट जमा हो जाती है, जिससे पानी का प्रवाह प्रभावित होता है।
इसे ध्यान में रखते हुए चालू वित्तीय वर्ष में 17,500 किलोमीटर ड्रेनों की सफाई का लक्ष्य तय किया गया है। अब तक 11,065 किलोमीटर ड्रेनों की सफाई का कार्य लगभग पूरा किया जा चुका है। शेष कार्य को मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, सभी कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है, ताकि समय सीमा के भीतर गुणवत्ता के साथ योजनाएं पूरी की जा सकें। इन प्रयासों से किसानों को पर्याप्त सिंचाई जल उपलब्ध होगा और बाढ़ व जलभराव की समस्याओं से भी राहत मिलने की उम्मीद है।