केंद्रीय बजट पर सवाल: सबका हक़ ऑर्गेनाइजेशन ने कहा—गरीबों से ज़्यादा पूंजीपतियों को फायदा

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केंद्रीय बजट पर सवाल: सबका हक़ ऑर्गेनाइजेशन ने कहा—गरीबों से ज़्यादा पूंजीपतियों को फायदा

रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता

बरेली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा 1 फरवरी 2026 को संसद में पेश किए गए बजट 2026-27 को लेकर विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों की ओर से सवाल उठने लगे हैं। बरेली स्थित सामाजिक संगठन सबका हक़ ऑर्गेनाइजेशन की अध्यक्षा राफिया शबनम ने बजट को गरीब, किसान और मजदूर वर्ग के लिए निराशाजनक बताया है।

राफिया शबनम का कहना है कि सरकार भले ही इसे गरीब, महिला, युवा और किसान केंद्रित बजट बता रही हो, लेकिन वास्तविक प्रावधानों में कमजोर वर्गों को कोई ठोस राहत नजर नहीं आती। उनके अनुसार बजट का झुकाव बड़े कॉर्पोरेट और पूंजीपति वर्ग की ओर अधिक दिखाई देता है।

उन्होंने कहा कि किसानों के लिए सरकार ने भारत-विस्तार (Bharat-VISTAAR) जैसे एआई आधारित टूल, उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा देने, पुराने बागानों के नवीनीकरण, मछली पालन के लिए 2,761 करोड़ रुपये और उर्वरक सब्सिडी पर 1.71 लाख करोड़ रुपये के प्रावधान की घोषणा जरूर की है, लेकिन इसके बावजूद कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के कुल बजट में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 9,000 करोड़ रुपये की कटौती हुई है।

राफिया शबनम ने सवाल उठाया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को लेकर कोई नया ऐलान नहीं किया गया, छोटे और मझोले किसानों को सीधा लाभ पहुंचाने वाली योजनाओं का दायरा सीमित है और किसानों की आय दोगुनी करने का वादा अब भी अधूरा बना हुआ है।

उन्होंने यह भी कहा कि बजट में आयकर स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया, जबकि विदेश यात्रा पर लगने वाले टीसीएस को घटाकर आम आदमी की तुलना में संपन्न वर्ग को राहत दी गई है। महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर बजट में कोई ठोस समाधान नजर नहीं आता।

वहीं सरकार का दावा है कि बजट में ग्रामीण विकास के लिए 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है, इंफ्रास्ट्रक्चर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, विनिर्माण और रोजगार सृजन पर विशेष जोर दिया गया है। सरकार ने राजकोषीय घाटा जीडीपी के 4.3 प्रतिशत तक सीमित रखने और पूंजीगत व्यय बढ़ाने का लक्ष्य भी रखा है।

कुल मिलाकर लगभग 53.5 लाख करोड़ रुपये के इस बजट को लेकर प्रतिक्रियाएं बंटी हुई हैं। सरकार इसे विकसित भारत की दिशा में अहम कदम बता रही है, जबकि विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यह बजट आम जनता से अधिक बड़े उद्योगपतियों के हित में तैयार किया गया है।

बजट का वास्तविक असर आने वाले महीनों में योजनाओं के क्रियान्वयन के बाद ही साफ हो सकेगा।

Saurabh Gupta
Author: Saurabh Gupta