त्रिवतीनाथ मंदिर नीलामी विवाद पर नगर निगम की सफाई, दबाव में आकर बदला रुख

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त्रिवतीनाथ मंदिर नीलामी विवाद पर नगर निगम की सफाई, दबाव में आकर बदला रुख

मंदिर नहीं, परिसर की दुकानों और बैंक भवन पर था कुर्की नोटिस : नगर निगम

रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता

बरेली। त्रिवतीनाथ मंदिर की नीलामी से जुड़ी खबरों ने जबरदस्त विवाद खड़ा कर दिया, जिसके बाद बरेली नगर निगम को बैकफुट पर आना पड़ा। मीडिया और सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाओं के बीच नगर निगम ने शुक्रवार को आधिकारिक बयान जारी कर अपना पक्ष रखा और पूरे मामले पर सफाई दी।

नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि जिस नोटिस को लेकर आक्रोश फैला, वह त्रिवतीनाथ मंदिर के लिए नहीं, बल्कि मंदिर परिसर में संचालित व्यावसायिक दुकानों और भारतीय स्टेट बैंक की इमारत के लिए जारी किया गया था। इन परिसरों पर लंबे समय से संपत्तिकर बकाया है।

नगर निगम की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि किसी भी धार्मिक स्थल पर न तो कुर्की की कार्रवाई की गई है और न ही नीलामी का कोई प्रस्ताव है। निगम के अनुसार कर निर्धारण और वसूली की प्रक्रिया केवल उन व्यावसायिक संपत्तियों पर लागू होती है, जो धार्मिक परिसरों के भीतर होते हुए भी व्यवसायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल की जा रही हैं।

नगर आयुक्त संजीव मौर्य द्वारा जारी स्पष्टीकरण में यह भी बताया गया कि शहर भर में कई आवासीय और व्यावसायिक भवनों पर संपत्तिकर बकाया है और नियमानुसार सभी पर कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में विदेश मंत्रालय से जुड़े पासपोर्ट कार्यालय के कुछ आवासीय-व्यावसायिक भवनों को भी नोटिस जारी किए गए हैं।

दरअसल, विवाद तब भड़का जब नगर निगम की एक सूची में त्रिवतीनाथ मंदिर का नाम सामने आया। इसके बाद धार्मिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों में नाराज़गी फैल गई। लोगों ने इसे आस्था पर हमला बताते हुए विरोध शुरू कर दिया, जिससे नगर निगम पर जबरदस्त दबाव बन गया।

हालात बिगड़ते देख नगर निगम को सार्वजनिक रूप से सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी। निगम ने दोहराया कि मंदिर, मस्जिद या किसी भी धार्मिक स्थल को नीलाम करने की मंशा नहीं है, बल्कि कार्रवाई केवल उन संपत्तियों के खिलाफ की जा रही है, जिन पर वर्षों से टैक्स बकाया है।

हालांकि नगर निगम की सफाई के बाद फिलहाल माहौल कुछ हद तक शांत हुआ है, लेकिन निगम की कार्यप्रणाली और शुरुआती सूचना जारी करने के तरीके पर सवाल अब भी कायम हैं। लोगों का कहना है कि अगर शुरुआत में ही स्थिति स्पष्ट कर दी जाती, तो इतना बड़ा विवाद खड़ा ही नहीं होता।

Saurabh Gupta
Author: Saurabh Gupta