
गंभीर मुकदमे का आरोपी थाने में खेलता दिखा, बहेड़ी पुलिस की भूमिका पर उठे अब सवालिया निशान
नामजद आरोपी को मिली ‘थाने की छूट’? खनन माफिया–पुलिस गठजोड़ की चर्चाएं हुई तेज
जानलेवा हमले का केस, फिर भी आरोपी आज़ाद—बहेड़ी थाने की कार्यशैली आयी कटघरे में
रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता
बरेली। बहेड़ी थाना क्षेत्र से जुड़ा एक संगीन आपराधिक मामला इन दिनों पुलिस की कार्यशैली को लेकर तीखी बहस का विषय बना हुआ है। जानलेवा हमले जैसे गंभीर आरोपों में नामजद व्यक्ति को लेकर सामने आई गतिविधियों ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
जानकारी के मुताबिक, थाना बहेड़ी में क्राइम नंबर 22/2026, दिनांक 7 जनवरी 2026 को प्रशांत शर्मा निवासी केशवपुरम की तहरीर पर सूर्या कुर्मी समेत अन्य के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। तहरीर में आरोप लगाया गया कि खनन से जुड़े लोगों ने एक राय होकर प्रार्थी को घेर लिया, असलहा दिखाकर धमकाया, गाली-गलौज की और बेरहमी से मारपीट की। आरोप है कि जान से मारने की नीयत से फायरिंग भी की गई, हालांकि प्रार्थी संयोगवश बच गया।
मामला दर्ज होने के बाद आमतौर पर पुलिस से त्वरित गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की अपेक्षा की जाती है, लेकिन इस प्रकरण में हालात इसके विपरीत नजर आ रहे हैं। स्थानीय लोगों और सूत्रों का दावा है कि नामजद आरोपी सूर्या कुर्मी को हाल ही में बहेड़ी थाना परिसर में ही पुलिसकर्मियों के साथ वॉलीबॉल खेलते हुए देखा गया। इस दृश्य के सामने आते ही क्षेत्र में पुलिस और आरोपी के बीच नजदीकी संबंधों की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सूत्रों का यह भी कहना है कि सूर्या कुर्मी लंबे समय से अवैध खनन गतिविधियों से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि रात के समय भारी वाहनों के जरिए मिट्टी खनन का खेल खुलेआम चलता है, लेकिन संबंधित विभागों की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं होती। गंभीर मुकदमे के बावजूद आरोपी की सक्रियता और पुलिस से कथित मेलजोल ने सवालों को और गहरा कर दिया है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब किसी संगीन अपराध में नामजद व्यक्ति का थाना परिसर में खुलेआम आना-जाना और पुलिसकर्मियों के साथ घुलना-मिलना सामने आए, तो आम जनता का भरोसा कानून व्यवस्था से कैसे बना रहेगा। पीड़ित पक्ष खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है।
गौरतलब है कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की ओर से लगातार अपराधियों और खनन माफियाओं पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए जा रहे हैं, लेकिन यह मामला उन दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े करता है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होगी, आरोपी के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी और थाना स्तर पर सामने आई भूमिका की समीक्षा कर जिम्मेदारों पर कदम उठाए जाएंगे, या फिर यह मामला भी समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा।