
सायरन बजते ही थम गई बरेली की रफ्तार, कलेक्ट्रेट बना युद्ध का मैदान
हवाई हमले की गूंज, अंधेरे में डूबा कलेक्ट्रेट—बरेली में हाई अलर्ट मॉक ड्रिल
ब्लैकआउट, धमाकों की आवाज़ और एंबुलेंस का शोर… बरेली ने देखा युद्धकालीन अभ्यास
10 मिनट का अंधेरा, सायरन की चीख और आग की लपटें—कलेक्ट्रेट में मॉक ड्रिल से हड़कंप
युद्ध जैसे हालात का लाइव रिहर्सल, बरेली कलेक्ट्रेट में सिविल डिफेंस की बड़ी कवायद
सायरन, धमाके और अंधेरा… बरेली कलेक्ट्रेट में दिखे युद्धकालीन हालात
रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता
बरेली। शुक्रवार शाम बरेली कलेक्ट्रेट परिसर उस वक्त अचानक युद्ध क्षेत्र में तब्दील हो गया, जब सिविल डिफेंस द्वारा आयोजित ब्लैकआउट मॉक ड्रिल के दौरान तेज सायरनों की आवाज़ गूंज उठी। यह अभ्यास किसी भी संभावित युद्ध, हवाई हमले या आपदा की स्थिति में प्रशासन और नागरिकों की तैयारियों को परखने के उद्देश्य से किया गया।
शाम 6:15 बजे जैसे ही सायरन बजे, पूरा इलाका कुछ ही पलों में हाई अलर्ट मोड में आ गया। कलेक्ट्रेट परिसर में हवाई हमले और बम धमाकों जैसे साउंड इफेक्ट्स के जरिए वास्तविक आपात स्थिति का माहौल तैयार किया गया, जिससे मौजूद लोग भी पलभर को सहम गए।

आगजनी और घरेलू आग से निपटने का लाइव डेमो
मॉक ड्रिल के दौरान अलग-अलग स्थानों पर आग लगने जैसी कृत्रिम परिस्थितियां बनाई गईं। सिविल डिफेंस के प्रशिक्षित वार्डनों और स्वयंसेवकों ने बिना समय गंवाए फायर फाइटिंग उपकरणों का इस्तेमाल कर आग बुझाने का प्रदर्शन किया।
इसके साथ ही घरेलू आग (डोमेस्टिक फायर) से निपटने के तरीकों को भी दिखाया गया, ताकि आम लोग समझ सकें कि हमले या विस्फोट के बाद किस तरह राहत और बचाव कार्य तेजी से किए जाएं।

कलेक्ट्रेट और आसपास सख्त ब्लैकआउट
निर्धारित समय पर कलेक्ट्रेट परिसर की सभी आंतरिक और बाहरी लाइटें बंद करा दी गईं।
आसपास मौजूद सरकारी दफ्तरों, अधिवक्ता चैंबरों और रिहायशी इलाकों में भी ब्लैकआउट के नियमों का कड़ाई से पालन कराया गया।
सिविल डिफेंस वार्डन लगातार गश्त करते रहे। जहां कहीं भी रोशनी बाहर निकलने की आशंका दिखी, वहां खिड़कियों को काले कागज और पर्दों से ढकने का अभ्यास कराया गया।
नागरिकों को दिए गए अहम सुरक्षा निर्देश
मॉक ड्रिल के दौरान लोगों से अपील की गई थी कि वे:-
घरों के अंदर ही रहें
सभी लाइटें बंद रखें
मोबाइल फ्लैश, टॉर्च और माचिस का इस्तेमाल न करें
धूम्रपान से बचें
शांति बनाए रखें और अफरा-तफरी न फैलाएं
एंबुलेंस सायरन से और वास्तविक हुआ माहौल :-
ड्रिल के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर में एंबुलेंस सायरनों की आवाजें लगातार सुनाई देती रहीं, जिससे अभ्यास और भी ज्यादा वास्तविक नजर आया।
प्रशासन और मंत्री रहे मौके पर मौजूद
इस हाई लेवल मॉक ड्रिल में
जिलाधिकारी अविनाश सिंह, एसपी सिटी मानुष पारीक, एसपी ट्रैफिक अकमल खान, जिला सूचना अधिकारी, सिविल डिफेंस के वरिष्ठ अधिकारी, प्रशासनिक अफसर और बड़ी संख्या में स्वयंसेवक मौजूद रहे।
विशेष रूप से उत्तर प्रदेश सरकार के वन मंत्री अरुण कुमार सक्सेना भी मौके पर पहुंचे और पूरे अभ्यास का निरीक्षण किया।
“जन-सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी हैं ऐसे अभ्यास” – डीएम
जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने कहा—
“ब्लैकआउट मॉक ड्रिल जैसे अभ्यास भविष्य में किसी भी युद्ध, हवाई हमले या आपदा के दौरान जन-सुरक्षा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। आम नागरिकों को भी ऐसे कार्यक्रमों में पूरा सहयोग करना चाहिए।”
आपदा प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम
यह मॉक ड्रिल आपदा प्रबंधन, फायर सेफ्टी और नागरिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक प्रभावी पहल साबित हुई। इससे न सिर्फ प्रशासन बल्कि आम नागरिकों की भी आपात स्थितियों से निपटने की तैयारी को नई धार मिली।