
दिवंगत भाजपा विधायक प्रो. श्याम बिहारी लाल की राजनीतिक विरासत का वारिस कौन?
रिपोर्ट/सौरभ गुप्ता
फरीदपुर में उपचुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज
बरेली।फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक प्रोफेसर डॉ. श्याम बिहारी लाल के आकस्मिक निधन के बाद न केवल क्षेत्र में शोक की लहर है, बल्कि उनकी राजनीतिक विरासत को लेकर सियासी गलियारों में चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।
दो जनवरी को हार्ट अटैक से उनके निधन के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है……कि फरीदपुर सीट पर उपचुनाव होगा, और इसी के साथ यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि भाजपा उनकी राजनीतिक विरासत का वारिस किसे बनाएगी।
दो दशक की राजनीतिक तपस्या, दो ऐतिहासिक जीत
प्रो. श्याम बिहारी लाल बीते करीब 20 वर्षों से भाजपा के समर्पित कार्यकर्ता के रूप में फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय थे। वर्ष 2007 और 2012 के विधानसभा चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन पार्टी ने उन पर भरोसा बनाए रखा।
जनता का समर्थन मिलने के बाद उन्होंने 2017 और 2022 में लगातार दो बार जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया। वह फरीदपुर से लगातार दो चुनाव जीतने वाले पहले विधायक बने।
कड़ा रहा है फरीदपुर का सियासी इतिहास
फरीदपुर सुरक्षित विधानसभा सीट पर वर्ष 1990 से 2022 तक हुए आठ विधानसभा चुनावों में सपा ने चार बार, भाजपा ने तीन बार और बसपा ने एक बार जीत हासिल की है।
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में प्रो. श्याम बिहारी लाल ने सपा प्रत्याशी विजय पाल सिंह को महज 2921 मतों के अंतर से हराया था। ऐसे में उपचुनाव की स्थिति में सपा इस सीट पर पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में जुट सकती है।
भाजपा की पहली नजर परिवार पर
भाजपा से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पार्टी नेतृत्व सबसे पहले प्रो. श्याम बिहारी लाल के परिवार के भीतर से ही संभावित प्रत्याशी तलाश सकता है।
यदि परिवार से कोई सदस्य चुनाव लड़ने के लिए आगे नहीं आता है, तो पार्टी किसी अनुभवी या मजबूत संगठनात्मक कार्यकर्ता पर दांव लगा सकती है। फिलहाल पार्टी स्तर पर इस मुद्दे पर औपचारिक चर्चा शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं।
बसपा के चुनाव न लड़ने से मुकाबला सीधा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बसपा प्रायः उपचुनावों से दूरी बनाए रखती है।
यदि ऐसा ही रहा, तो फरीदपुर उपचुनाव में मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा और सपा के बीच ही सिमट जाएगा, जिससे चुनाव और भी रोचक व चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
फरीदपुर बनी अंतिम विदाई की साक्षी
प्रो. श्याम बिहारी लाल अपने परिवार के साथ बरेली के शक्तिनगर कॉलोनी में रहते थे।
शुरुआत में उनकी अंत्येष्टि शहर में ही होने की संभावना थी, लेकिन फरीदपुर की जनता से उनके गहरे राजनीतिक और भावनात्मक जुड़ाव को देखते हुए भाजपा नेताओं ने परिजनों से चर्चा की।
इसके बाद निर्णय लिया गया कि उनकी अंत्येष्टि फरीदपुर स्थित श्मशान भूमि पर ही की जाए। शनिवार को अंतिम संस्कार के दौरान भारी संख्या में लोग उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे।
अधूरी रह गई दूसरी पारी
लगातार दो बार विधायक चुने जाने का कीर्तिमान रचने के बावजूद प्रो. श्याम बिहारी लाल अपना दूसरा कार्यकाल पूरा नहीं कर सके।
अंतिम संस्कार के दौरान मौजूद क्षेत्रीय लोगों का कहना था कि उनकी बेबाक शैली, सरल स्वभाव और अपनी कर्मभूमि के प्रति प्रतिबद्धता को फरीदपुर लंबे समय तक याद रखेगा।
पार्टी के लिए अपूरणीय क्षति
भाजपा आंवला जिलाध्यक्ष आदेश प्रताप सिंह ने कहा कि प्रो. श्याम बिहारी लाल एक प्रख्यात शिक्षाविद और जनप्रिय जनप्रतिनिधि थे।
उनका असामयिक निधन भाजपा के लिए बड़ी क्षति है। फरीदपुर की जनता उनकी जनसेवा, विकास कार्यों और सादगीपूर्ण जीवन को हमेशा याद रखेगी।