
अरावली पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी सख्ती, पुराने फैसले पर लगाई ब्रेक
नई दिल्ली
नई दिल्ली। देश की सबसे पुरानी पर्वतमालाओं में शुमार अरावली को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर बड़ा हस्तक्षेप किया है। पर्यावरण सुरक्षा के मोर्चे पर सख्त रुख अपनाते हुए शीर्ष अदालत ने अपने ही पुराने आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है और केंद्र सरकार समेत चार राज्यों से जवाब तलब किया है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने 20 नवंबर 2025 के उस आदेश को स्थगित कर दिया, जिसमें अरावली की परिभाषा को लेकर विवादित मानक तय किए गए थे। कोर्ट के इस कदम को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अहम माना जा रहा है।
100 मीटर या उससे अधिक का विषय बना विवाद
दरअसल, पिछले आदेश में सिर्फ उन्हीं पहाड़ियों को अरावली माना गया था, जिनकी ऊंचाई ज़मीन से 100 मीटर या उससे अधिक थी। पर्यावरण विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का आरोप था कि इस शर्त के चलते अरावली का बड़ा हिस्सा कानूनी दायरे से बाहर हो जाता, जिससे अवैध खनन और बेतहाशा निर्माण को खुली छूट मिल जाती।
नई समिति करेगी परिभाषा तय
अब सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए नई उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति के गठन का आदेश दिया है। यह समिति अरावली की वैज्ञानिक परिभाषा और उसके पारिस्थितिक प्रभावों का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंपेगी।
खनन पर तत्काल ब्रेक
कोर्ट ने साफ कर दिया है कि जब तक समिति की रिपोर्ट नहीं आ जाती और अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक अरावली क्षेत्र में नए खनन पट्टे जारी नहीं होंगे। साथ ही, मौजूदा हालात को जस का तस बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि प्राकृतिक संरचना और जैव विविधता को कोई नुकसान न पहुंचे।
चार राज्यों को नोटिस
इस मामले में केंद्र सरकार के साथ हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और गुजरात सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
अगली सुनवाई: 21 जनवरी 2026
देश की ‘ग्रीन वॉल’ कही जाने वाली अरावली पर सुप्रीम कोर्ट का यह कदम पर्यावरण प्रेमियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।