
सावित्रीबाई फुले को भारत रत्न देने और बौद्धों के लिए अलग पर्सनल लॉ की मांग
रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता
बरेली। राष्ट्रीय बौद्ध महासभा की ओर से समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले को भारत रत्न देने और बौद्ध समुदाय के लिए अलग पर्सनल लॉ लागू करने की मांग उठाई गई है। इस संबंध में संगठन के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व जिला अध्यक्ष सतीश कुमार बौद्ध ने किया।
ज्ञापन में कहा गया कि सावित्रीबाई फुले ने महिलाओं और वंचित वर्गों को शिक्षा से जोड़ने के लिए ऐतिहासिक संघर्ष किया। उन्हें देश की पहली महिला शिक्षिका और महान समाज सुधारक बताते हुए कहा गया कि सामाजिक विरोध और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने शिक्षा और समानता का संदेश दिया। संगठन का कहना है कि उनके अतुलनीय योगदान को देखते हुए उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया जाना चाहिए।
महासभा के पदाधिकारियों ने बौद्ध समुदाय के लिए अलग पर्सनल लॉ बनाए जाने की भी मांग की। उनका कहना है कि बौद्ध धर्म की अपनी अलग परंपराएं, संस्कार और धार्मिक मान्यताएं हैं, लेकिन अलग कानून नहीं होने के कारण कई सामाजिक और धार्मिक कार्य हिंदू कानून के तहत संचालित होते हैं। ऐसे में बौद्ध समाज के लिए अलग धर्म-संहिता बनाए जाने की आवश्यकता है।
इसके साथ ही बिहार स्थित महाबोधि महाविहार के प्रबंधन को पूरी तरह बौद्ध समाज को सौंपने की मांग भी ज्ञापन में उठाई गई। संगठन का कहना है कि यह स्थल भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली और विश्वभर के बौद्धों की आस्था का प्रमुख केंद्र है, इसलिए इसका संचालन बौद्ध समुदाय के हाथों में होना चाहिए।
संगठन ने पाली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने तथा सावित्रीबाई फुले, महात्मा ज्योतिबा फुले और फातिमा शेख के जीवन व संघर्ष को शैक्षिक पाठ्यक्रम में शामिल करने की भी मांग की।
इस दौरान जगदीश बाबू, रणवीर सिंह समेत संगठन के कई पदाधिकारी मौजूद रहे।