
99 साल की लीज में अटका बरेली एयरपोर्ट विस्तार, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का सपना अधूरा
जमीन खरीदी, मुआवजा दिया… फिर भी नहीं उड़ा एयरपोर्ट! फाइलों में फंसा 53 करोड़ का प्रोजेक्ट
लीज पर अटकी मुहर, विकास पर ब्रेक—कब टेकऑफ करेगा बरेली एयरपोर्ट
रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता
बरेली। जमीन अधिग्रहित, मुआवजा वितरित और बजट स्वीकृत… इसके बावजूद एयरपोर्ट विस्तार की रफ्तार फाइलों की धूल में दब गई है। 23.55 एकड़ जमीन अधिग्रहण के बाद भी भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को 99 साल की लीज न मिलने से पूरा प्रोजेक्ट ठप पड़ा है। शहरवासियों की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की उम्मीद फिलहाल इंतजार में है।
53 करोड़ मंजूर, लेकिन काम आगे नहीं बढ़ा
एयरपोर्ट विस्तार के लिए 53.40 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई। 16.97 एकड़ निजी जमीन खरीदकर 44.26 करोड़ रुपये मुआवजा भी बांट दिया गया। शेष 6.58 एकड़ जमीन ग्राम सभा, राज्य सरकार और रक्षा संपदा विभाग के हिस्से में है। अधिग्रहण की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है, मगर लीज अनुबंध की औपचारिकता पूरी न होने से निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा।
सूत्रों के अनुसार अक्टूबर 2025 से फाइल दिल्ली और लखनऊ के बीच घूम रही है। कई बार पत्राचार हुआ, लेकिन अब तक लीज एग्रीमेंट का मसौदा तैयार नहीं हो सका। हालात ऐसे हैं कि प्राधिकरण खुद ड्राफ्ट देने को तैयार है, ताकि प्रक्रिया आगे बढ़ सके।
बिना विस्तार कैसे भरेंगी अंतरराष्ट्रीय उड़ानें?
शहर में लंबे समय से चर्चा है कि बरेली से विदेशों के लिए उड़ानें शुरू होंगी। कुछ निजी कंपनियों से शुरुआती बातचीत भी हुई थी। लेकिन मौजूदा ढांचे में बड़े विमानों की नियमित आवाजाही संभव नहीं है। एयरपोर्ट के पास अलग समर्पित हवाई पट्टी नहीं है। विस्तार के बिना नई सुविधाएं और अतिरिक्त फ्लाइट्स महज घोषणा बनकर रह जाएंगी।
होली पर किराए ने भरी ऊंची उड़ान
इधर त्योहार से पहले हवाई किराए ने यात्रियों की जेब पर बोझ बढ़ा दिया है। सामान्य दिनों में बरेली से मुंबई और बेंगलुरु का किराया 6-7 हजार रुपये के बीच रहता है, लेकिन होली के आसपास यही किराया 14-15 हजार तक पहुंच गया है। एयरलाइंस का कहना है कि मांग बढ़ने के कारण 70-80 प्रतिशत सीटें पहले ही बुक हो जाती हैं।
IndiGo के 232 सीटों वाले एयरबस में भी टिकट तेजी से भर रहे हैं। जो यात्री आखिरी समय पर टिकट बुक कर रहे हैं, उन्हें लगभग दोगुना किराया चुकाना पड़ रहा है।
उड़ानें नियमित, पर भविष्य अनिश्चित
फिलहाल मुंबई और बेंगलुरु की फ्लाइट्स तय समय पर संचालित हो रही हैं। यात्रियों को मूलभूत सुविधाएं भी मिल रही हैं। लेकिन सवाल यही है कि जब विस्तार की प्रक्रिया ही अटकी है, तो नई उड़ानों और अंतरराष्ट्रीय सेवाओं का रास्ता कैसे खुलेगा?
बरेली जैसे तेजी से बढ़ते शहर के लिए एयरपोर्ट केवल यात्रा का साधन नहीं, बल्कि औद्योगिक और व्यावसायिक विकास की धुरी है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं की रफ्तार कब तेज होगी और कब वाकई बरेली एयरपोर्ट का विस्तार जमीन पर उतरकर टेकऑफ करेगा।
