
इस्तीफे से सियासत तक: अलंकार अग्निहोत्री का बड़ा दांव, ‘राम’ के नाम पर किया नई पार्टी का ऐलान
पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट की राजनीतिक एंट्री से बरेली में मची हलचल, बदलेगा समीकरण?
‘सवर्ण सम्मान से सामाजिक समरसता’ तक—”राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा “का एजेंडा किया जारी
रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता
बरेली। यूजीसी नियमों के विरोध में पद छोड़कर सुर्खियों में आए बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अब सियासत के मैदान में खुलकर कदम रख दिया है। सोमवार को उन्होंने अपने नए राजनीतिक दल राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा (राम) के गठन की घोषणा करते ही जिले की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी।
इस्तीफे के बाद बढ़ी थीं अटकलें
अग्निहोत्री के इस्तीफे के बाद से ही शहर में यह चर्चा जोरों पर थी कि वह सामाजिक और राजनीतिक मोर्चे पर सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं। लाल फाटक स्थित परशुराम धाम में सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों के साथ उनकी बैठक ने इन अटकलों को और बल दिया था। उस समय उन्होंने संकेत दिया था कि “समय आने पर बड़ा फैसला लिया जाएगा”—और अब वही संकेत एक राजनीतिक दल के रूप में सामने आ चुका है।
सवर्णों के अधिकार, शोषितों की आवाज—दोनों पर फोकस
पार्टी की घोषणा करते हुए अग्निहोत्री ने स्पष्ट किया कि उनका मंच किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं रहेगा।
उन्होंने कहा—
“हम सवर्ण समाज के सम्मान और अधिकार की बात करेंगे, लेकिन साथ ही शोषित और उपेक्षित वर्गों की आवाज को भी मजबूती देंगे।”
उनका दावा है कि राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा (राम) समाज में संतुलन, सम्मान और न्याय आधारित राजनीति को आगे बढ़ाने का कार्य करेगा।
सनातन संस्कृति और सामाजिक समरसता पर जोर
पार्टी का झंडा और चुनाव चिह्न जारी करते हुए उन्होंने कहा कि संगठन की वैचारिक नींव सनातन संस्कृति और सामाजिक समरसता पर आधारित होगी। समर्थकों से अपील करते हुए उन्होंने इसे एक व्यापक जनांदोलन में बदलने का आह्वान किया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पूर्व प्रशासनिक अधिकारी की यह एंट्री आगामी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। खासकर सवर्ण वोट बैंक और सामाजिक संतुलन की राजनीति के संदर्भ में इसका असर देखने को मिल सकता है।
क्या बदलेगा बरेली का राजनीतिक परिदृश्य?
पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट का यह कदम आने वाले चुनावों में कितना प्रभाव डालेगा, यह समय बताएगा। लेकिन इतना तय है कि बरेली की राजनीति में एक नया मोर्चा खुल चुका है—और पुराने समीकरणों पर सवाल खड़े हो गए हैं।

फिलहाल, सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ‘राम’ के नाम पर बना यह नया राजनीतिक मंच जमीनी स्तर पर कितना असर दिखा पाता है।