ओसवाल शुगर मिल भुगतान संकट: नीलामी पर आपत्ति से अटका किसानों का हक, पैनी नजर संस्था ने उठाए सवाल

Spread the love

 

ओसवाल शुगर मिल भुगतान संकट: नीलामी पर आपत्ति से अटका किसानों का हक, पैनी नजर संस्था ने उठाए सवाल

रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता

बरेली। नवाबगंज स्थित ओसवाल शुगर मिल से जुड़े गन्ना भुगतान मामले में एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है। किसानों को लंबित भुगतान मिलने में हो रही देरी को लेकर पैनी नजर सामाजिक संस्था की अध्यक्ष एडवोकेट सुनीता गंगवार ने प्रेस वार्ता कर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल खड़े किए।

एडवोकेट सुनीता गंगवार ने आरोप लगाया कि मिल की संपत्ति की नीलामी को लेकर उठाई गई आपत्तियों के कारण किसानों के भुगतान की प्रक्रिया जानबूझकर प्रभावित की जा रही है। उन्होंने बताया कि 22 जनवरी को प्रशासन द्वारा ओसवाल शुगर मिल की करीब 52 बीघा भूमि की नीलामी कराई गई थी, जिसमें लगभग 1 करोड़ 45 लाख रुपये की बोली लगी।

संस्था अध्यक्ष के अनुसार, नीलामी के कुछ ही दिनों बाद क्षेत्रीय विधायक द्वारा मंडल आयुक्त को पत्र भेजकर नीलामी पर आपत्ति जताई गई और इसे निरस्त करने की मांग की गई। विधायक की ओर से तर्क दिया गया कि भूमि कम कीमत पर बेची गई, जबकि प्रशासनिक रिकॉर्ड के मुताबिक यह नीलामी सर्किल रेट से अधिक मूल्य पर संपन्न हुई थी।

सुनीता गंगवार ने कहा कि इससे पहले भी दो बार नीलामी रद्द हो चुकी है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि किसानों के भुगतान से ज्यादा चिंता मिल के हितों को लेकर दिखाई जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किसानों की मेहनत की कमाई बार-बार क्यों दांव पर लगाई जा रही है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछले वर्ष किसानों के आंदोलन के दौरान मिल की संपत्ति बेचकर भुगतान कराने का भरोसा दिलाया गया था, लेकिन अब उसी प्रक्रिया का विरोध किया जा रहा है। संस्था ने इसे किसानों के साथ विश्वासघात करार दिया।

पैनी नजर संस्था ने चेतावनी दी कि यदि आपत्तियों के नाम पर भुगतान प्रक्रिया रोकी गई या किसी तरह की अनियमितता सामने आई, तो किसान दोबारा आंदोलन के लिए मजबूर होंगे और तहसील परिसर में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

Saurabh Gupta
Author: Saurabh Gupta