
प्रमोशन और शोहरत के लिए गोली चलाना कानून नहीं, अपराध है: हाईकोर्ट
‘हाफ एनकाउंटर’ पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्त फटकार, पुलिस को दी कड़ी चेतावनी
आरोपी को सजा देने का अधिकार सिर्फ अदालत को, पुलिस को नहीं: हाईकोर्ट
रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता
इलाहाबाद। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस के तथाकथित ‘हाफ एनकाउंटर’ की प्रवृत्ति पर गंभीर चिंता जताते हुए इसे कानून व्यवस्था के लिए खतरनाक बताया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि बिना वास्तविक आवश्यकता के हथियार का प्रयोग करना न केवल अवैध है, बल्कि यह मानवाधिकारों का भी सीधा उल्लंघन है।
हाईकोर्ट ने कहा कि हाल के वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें आरोपियों को जानबूझकर घुटने के नीचे गोली मारकर एनकाउंटर का रूप देने का प्रयास किया गया। अदालत ने इस पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाइयों से पुलिस की भूमिका न्यायाधीश जैसी बन जाती है, जो संविधान के खिलाफ है।

अदालत ने टिप्पणी की कि कुछ पुलिसकर्मी प्रमोशन पाने, वरिष्ठ अधिकारियों की सराहना हासिल करने या सोशल मीडिया पर चर्चा में आने के उद्देश्य से ऐसी कार्यवाहियां कर रहे हैं। कोर्ट ने इसे अत्यंत चिंताजनक प्रवृत्ति बताते हुए कहा कि कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार किसी भी पुलिस अधिकारी को नहीं है।
हाईकोर्ट ने दो टूक कहा कि किसी भी आरोपी को दंड देने का अधिकार केवल न्यायपालिका के पास है। पुलिस का दायित्व कानून के दायरे में रहकर अपराधियों को गिरफ्तार करना और उन्हें न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना है, न कि गोली चलाकर फैसला सुनाना।
कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि ‘हाफ एनकाउंटर’ जैसी घटनाओं पर समय रहते सख्त नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह व्यवस्था को अराजकता की ओर ले जा सकती है। पुलिस को यह याद रखना होगा कि कानून का पालन तभी कराया जा सकता है, जब स्वयं पुलिस कानून का सम्मान करे।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की यह टिप्पणी प्रदेश की पुलिस व्यवस्था के लिए एक कड़ी चेतावनी मानी जा रही है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में एनकाउंटर से जुड़ी कार्रवाइयों पर न्यायिक निगरानी और अधिक सख्त हो सकती है।