
बरेली उपद्रव केस: पुलिस पर हमले के आरोपितों को कोर्ट से झटका, तीन की जमानत नामंजूर
हिंसा के आरोपितों पर सख्ती: बरेली दंगों में शामिल तीन आरोपियों को राहत नहीं
कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ पड़ा भारी, बरेली हिंसा मामले में तीन आरोपितों की जमानत खारिज
रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता
बरेली। शहर में हुई हिंसा और पुलिस पर जानलेवा हमले के मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए तीन आरोपितों को किसी भी तरह की राहत देने से इनकार कर दिया है। अपर जिला जज (चतुर्थ) अमृता शुक्ला की अदालत ने एक आरोपी की नियमित जमानत और दो अन्य की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।
26 सितंबर को कानपुर के ‘आई लव मुहम्मद’ प्रकरण को लेकर बरेली में हालात अचानक बेकाबू हो गए थे। मौलाना तौकीर रजा के आह्वान के बाद बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए और देखते ही देखते कई इलाकों में उपद्रव फैल गया। इस दौरान भीड़ ने पुलिस बल को निशाना बनाते हुए पथराव किया, फायरिंग की और पेट्रोल बम फेंककर हमला किया। कई स्थानों पर तोड़फोड़ और आगजनी की कोशिशें भी हुईं, वहीं पुलिस के कुछ उपकरण लूट लिए गए थे।
बरेली के ही पांच थानों में दर्ज हुए 10 मुकदमे……
घटना के बाद पुलिस ने कड़ी कार्रवाई करते हुए शहर के पांच अलग-अलग थानों में कुल 10 मुकदमे दर्ज किए। इनमें 125 लोगों को नामजद किया गया, जबकि लगभग तीन हजार अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया। कोतवाली थाने में सबसे अधिक पांच मुकदमे दर्ज हुए थे। पुलिस अब तक मौलाना तौकीर रजा सहित 92 आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
बारादरी थाना क्षेत्र के सेमलखेड़ा निवासी यूनुस, जो इस मामले में जेल में बंद है, उसकी जमानत याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया
अग्रिम जमानत की अर्जी भी की नामंजूर……..
वहीं सूफी टोला निवासी समनान हुसैन और सैलानी क्षेत्र के मुहम्मद मुस्तफा ने अग्रिम जमानत के लिए अदालत में याचिका दाखिल की थी। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी क्राइम महेश यादव ने दलील दी कि आरोपितों के खिलाफ ठोस और गंभीर साक्ष्य मौजूद हैं तथा उन्होंने सीधे तौर पर कानून-व्यवस्था को चुनौती दी थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिकाएं भी खारिज कर दीं।