
40 हजार में फर्जी आयुष्मान कार्ड का खेल! पांच आरोपी गिरफ्तार, 13 कार्ड बरामद; अस्पताल कर्मियों पर भी उठे सवाल, बरेली के कई अस्पतालों से जुड़े हों सकते हैं तार
40 हजार दो, पांच लाख तक के मुफ्त इलाज का रास्ता खोलो! फर्जी आयुष्मान कार्ड गिरोह का भंडाफोड़,
आयुष्मान योजना में बड़ा खेल: अपात्रों से 35-40 हजार वसूले, फर्जी कार्ड बनाकर अस्पतालों तक पहुंचाया
फर्जी आधार-राशन कार्ड से खुल रहा था मुफ्त इलाज का दरवाजा, पांच गिरफ्तार; अस्पताल कर्मी भी रडार पर
गरीबों के इलाज की योजना बनी कमाई का अड्डा! 13 फर्जी आयुष्मान कार्ड समेत सात मोबाइल बरामद
बरेली में फर्जी आयुष्मान कार्ड का नेटवर्क बेनकाब, मरीज से भी वसूली और सरकार से भी भुगतान लेने का आरोप
रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता
बरेली। गरीब और जरूरतमंद परिवारों को मुफ्त इलाज दिलाने वाली आयुष्मान भारत योजना में फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है। भोजीपुरा पुलिस ने ऐसे गिरोह का पर्दाफाश करने का दावा किया है, जो अपात्र लोगों से मोटी रकम लेकर आधार और राशन कार्ड में हेरफेर कर कथित तौर पर फर्जी आयुष्मान कार्ड तैयार कराता था। पुलिस ने गिरोह के पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से 13 कथित कूटरचित आयुष्मान कार्ड, छह आधार कार्ड, राशन कार्ड की 22 प्रतियां, सात मोबाइल फोन और नकदी बरामद हुई है।
ऐसे खुला पूरा खेल
👉पुलिस के मुताबिक नवाबगंज क्षेत्र के हरप्रसाद अपनी बेटी के इलाज के लिए ऋषिकेश एम्स पहुंचे थे।
👉आरोप है कि आबिद और उसके साथियों ने उनसे 47 हजार रुपये लेकर उनके और बेटी के आधार कार्ड में हेरफेर कराया।
👉इसके बाद कथित तौर पर आयुष्मान कार्ड तैयार कराया गया।
👉अस्पताल में कार्ड की जांच हुई तो उसकी असलियत सामने आ गई और इलाज नहीं हो सका।
👉रुपये वापस मांगने पर जब पीड़ित को टरकाया गया तो उसने पुलिस से शिकायत की।
👉इसी शिकायत के बाद भोजीपुरा थाने में मुकदमा दर्ज हुआ और जांच आगे बढ़ी।
👉35 से 40 हजार में तैयार होता था ‘फर्जी इलाज का टिकट’
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि अपात्र लोगों को आयुष्मान योजना में मुफ्त इलाज का लालच दिया जाता था। इसके बाद उनके आधार और राशन कार्ड लिए जाते और उनमें नाम-पते से छेड़छाड़ कर कथित फर्जी दस्तावेज तैयार किए जाते थे।
इसके बदले प्रत्येक व्यक्ति से करीब 35 से 40 हजार रुपये लेने का आरोप है। पुलिस के अनुसार इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर आयुष्मान कार्ड तैयार कराकर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के अस्पतालों में इलाज कराने की कोशिश की जाती थी।
एक तरफ मरीज से वसूली, दूसरी तरफ सरकारी भुगतान का आरोप
पुलिस की जांच में इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। आरोप है कि गिरोह केवल फर्जी कार्ड बनाने तक सीमित नहीं था।
अपात्र व्यक्ति से कार्ड बनाने के नाम पर हजारों रुपये लिए जाते।
फिर कथित तौर पर आयुष्मान कार्ड के जरिए अस्पताल में इलाज कराया जाता।
इलाज के बाद योजना के तहत सरकारी भुगतान हासिल करने की कोशिश की जाती।
यानी एक ही मामले में मरीज और सरकारी योजना, दोनों से कमाई का कथित खेल चल रहा था।
पुलिस ने मामले को गंभीर मानते हुए मुकदमे में बीएनएस की धारा 111 भी बढ़ाई है।
अस्पताल कर्मियों की भूमिका भी जांच के घेरे में
मामले की जांच अब अस्पतालों तक पहुंच गई है। पुलिस के प्रेस नोट में राममूर्ति अस्पताल के कर्मचारी नितिन, नरेश और अस्पताल से जुड़े कुछ अज्ञात लोगों का भी उल्लेख है।
गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ में अस्पताल कर्मचारियों की कथित मदद से अपात्र लोगों का इलाज कराने की बात कही है। हालांकि अस्पताल कर्मियों से जुड़े आरोप अभी जांच का हिस्सा हैं। पुलिस विवेचना के बाद ही उनकी वास्तविक भूमिका स्पष्ट होगी।
संभल सीएमओ कार्यालय तक जुड़ रहे तार
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने नरेश नाम के एक व्यक्ति का भी जिक्र किया है। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने दावा किया कि वह मुरादाबाद का रहने वाला है और संभल सीएमओ कार्यालय में काम करता है।
पुलिस अब इस दावे की भी जांच कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि फर्जी कार्ड बनाने और कथित इलाज कराने का नेटवर्क कितनी दूर तक फैला है।
मोबाइल से चलता था पूरा ‘ऑपरेशन’
पुलिस के मुताबिक आरोपियों को किसी बड़े दफ्तर की जरूरत नहीं थी। मोबाइल फोन और ऑनलाइन ऐप-पोर्टल के जरिए आधार, राशन कार्ड और आयुष्मान कार्ड से जुड़ी प्रक्रिया करने का दावा किया गया है।
काम पूरा होने के बाद दस्तावेजों का प्रिंट दुकान से निकलवाया जाता था। पुलिस ने आरोपियों के पास से सात मोबाइल फोन बरामद किए हैं। अब इन मोबाइलों की जांच से संपर्कों और लेनदेन से जुड़ी नई कड़ियां सामने आने की उम्मीद है।
अस्पताल के पीछे दबिश, पांचों दबोचे गए
पुलिस को सूचना मिली थी कि मुकदमे से जुड़े आरोपी राममूर्ति अस्पताल के पीछे प्रहलादपुर जाने वाले रास्ते पर ट्यूबवेल के पास मौजूद हैं। बताया गया कि वे कुछ लोगों के आने का इंतजार कर रहे थे।
बुधवार सुबह करीब 7:58 बजे पुलिस ने दबिश देकर पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपियों के नाम:
आबिद
सलमान
अरमान
अफरोज
देशरत्न
पुलिस का दावा है कि मौके पर भी कुछ लोगों से आयुष्मान कार्ड बनवाने को लेकर बातचीत होनी थी।
क्या-क्या हुआ बरामद
पुलिस के अनुसार आरोपियों के पास से:
7 मोबाइल फोन
13 कथित कूटरचित आयुष्मान कार्ड
6 कूटरचित आधार कार्ड
राशन कार्ड की 22 कूटरचित छायाप्रतियां
2700 रुपये नकद
बरामद किए गए हैं।
अब जांच में सामने आएंगे कई बड़े सवाल
पांच आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की जांच का दायरा और बढ़ सकता है। अब यह पता लगाने की कोशिश होगी कि गिरोह ने अब तक कितने अपात्र लोगों के कार्ड तैयार कराए।
जांच के प्रमुख सवाल हैं—
कितने लोगों से 35-40 हजार रुपये वसूले गए?
कितने फर्जी आयुष्मान कार्ड बनाए गए?
किन-किन अस्पतालों में इन कार्डों का इस्तेमाल हुआ?
आयुष्मान योजना से कितनी सरकारी धनराशि का भुगतान कराया गया?
अस्पताल कर्मचारियों की भूमिका कितनी थी?
क्या इस नेटवर्क में और लोग भी शामिल हैं?
विश्ववश सूत्रों के अनुसार बरेली के कई अस्पताल भी हों सकतें हैं सलिप्त
आबिद का पुराना रिकॉर्ड भी सामने आया
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी आबिद का आपराधिक इतिहास भी है। उसके खिलाफ वर्ष 2021 में प्रेमनगर थाने में चोरी, बरामदगी और धोखाधड़ी से संबंधित मुकदमा दर्ज बताया गया है। वर्ष 2022 में भोजीपुरा थाने में आर्म्स एक्ट का मामला भी दर्ज हुआ था।
मौजूदा मुकदमे को मिलाकर पुलिस रिकॉर्ड में उसके खिलाफ तीन मामले बताए गए हैं।
फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने और फर्जी कार्डों के जरिए हुए कथित सरकारी भुगतान का हिसाब जुटाने में लगी है।
