
डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा फैसला: पाकिस्तान की अपील पर बढ़ाया सीज़फायर, वॉशिंगटन में दिनभर चला हाई-वोल्टेज ड्रामा
ईरान-अमेरिका तनाव के बीच कूटनीति हुई तेज, इस्लामाबाद वार्ता टली तो बढ़ जाएगी वैश्विक चिंता
वॉशिंगटन! अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में मंगलवार को जबरदस्त कूटनीतिक हलचल देखने को मिली। डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक बड़ा फैसला लेते हुए ईरान के साथ चल रहे संघर्ष में सीज़फायर बढ़ाने का ऐलान कर दिया। खास बात यह रही कि यह निर्णय पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व की अपील पर लिया गया।
दिन की शुरुआत में हालात बेहद अनिश्चित थे। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का विमान इस्लामाबाद के लिए तैयार खड़ा था, जहां ईरान-अमेरिका वार्ता का नया दौर प्रस्तावित था। लेकिन घंटों इंतजार के बावजूद विमान उड़ान नहीं भर सका और बातचीत अधर में लटक गई।
दरअसल, इस दौरे की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई थी और ईरान की ओर से भी बातचीत को लेकर स्पष्ट सहमति नहीं मिली थी। ऐसे में व्हाइट हाउस के सामने असमंजस की स्थिति बन गई। हालात यह रहे कि अमेरिकी टीम के अहम सदस्य, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर इस्लामाबाद जाने के बजाय वापस वॉशिंगटन लौट आए।
इसके बाद व्हाइट हाउस में उच्च स्तरीय बैठकें शुरू हुईं, जहां आगे की रणनीति पर मंथन हुआ। दिनभर चली इस हलचल के बाद आखिरकार ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए सीज़फायर बढ़ाने का ऐलान कर दिया।
पाकिस्तान की मध्यस्थता आई काम ?
ट्रंप ने साफ कहा कि यह फैसला पाकिस्तान के अनुरोध पर लिया गया है। उन्होंने बताया कि आसिम मुनीर और शहबाज़ शरीफ़ ने आग्रह किया था कि ईरान पर सैन्य कार्रवाई तब तक रोकी जाए, जब तक बातचीत के जरिए कोई साझा प्रस्ताव सामने न आ जाए।
ट्रंप के इस कदम के बाद शहबाज़ शरीफ़ ने भी सार्वजनिक रूप से उनका आभार जताया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान पूरी निष्ठा के साथ कूटनीतिक समाधान की दिशा में काम करता रहेगा और उम्मीद है कि इस्लामाबाद में प्रस्तावित वार्ता के अगले दौर में स्थायी शांति की राह निकलेगी।
अनिश्चितता बरकरार
हालांकि इस बार ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि सीज़फायर कितने समय तक लागू रहेगा। इससे पहले उन्होंने दो हफ्तों की समय-सीमा तय की थी।
गौरतलब है कि ट्रंप के बयान हाल के दिनों में कई बार बदलते रहे हैं—एक ओर वे बातचीत को सकारात्मक बताते हैं, तो दूसरी ओर ईरान को लेकर सख्त चेतावनी भी देते रहे हैं।
गौरतलब रहे कि क्या इस्लामाबाद में प्रस्तावित वार्ता सच में हो पाएगी और क्या इससे लंबे समय से जारी तनाव का स्थायी समाधान निकल सकेगा।
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