ऊर्स-ए-नासिरी के कुल शरीफ में उमड़ी अकीदतमंदों की भीड़

Spread the love

 

ऊर्स-ए-नासिरी के कुल शरीफ में उमड़ी अकीदतमंदों की भीड़

अमन, भाईचारे और खुशहाली के लिए की गई खास दुआ, महफिल-ए-समां देर रात तक चली

रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता

बरेली। सिविल लाइंस स्थित मस्जिद नोमहला शरीफ में दरगाह नासिरी पर चल रहे 121वें उर्स-ए-नासिरी के तीसरे दिन कुल शरीफ के मौके पर बड़ी संख्या में अकीदतमंद जुटे। कार्यक्रम की शुरुआत सामूहिक सहरी से हुई। फज्र की नमाज के बाद कुरआन की तिलावत की गई। इसके बाद दरगाह के सज्जादानशीन ख्वाजा सुल्तान अहमद नासिरी से अकीदतमंदों ने मुलाकात कर दुआएं लीं।

दोपहर बाद महफिल-ए-समां का आयोजन किया गया, जिसमें फनकारों ने अपने कलामों के जरिए बुजुर्गों की रूहानी शख्सियत और उनकी शिक्षाओं को बयां किया। इस दौरान अकीदतमंदों ने मजार-ए-मुबारक पर चादर और फूल चढ़ाकर मन्नतें मांगीं और दुआ की।

असर और मगरिब की नमाज के बीच हजरत ख्वाजा मौलाना शफी नसीरुद्दीन उर्फ हजरत नासिर मियां रहमतुल्लाह अलैह का 121वां कुल शरीफ अदा किया गया। सज्जादानशीन ख्वाजा सुल्तान अहमद नासिरी ने खास दुआ कर देश और समाज में अमन-चैन, भाईचारा, तरक्की और खुशहाली की कामना की। साथ ही बीमारों के लिए शिफा, बेरोजगारों के लिए रोजगार और परेशान हाल लोगों के लिए राहत की दुआ मांगी गई।

दरगाह के प्रवक्ता एवं समाजसेवी पम्मी खान वारसी ने कहा कि सूफी परंपरा सादगी, इंसानियत और आपसी मोहब्बत का पैगाम देती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि शादियों में फिजूलखर्ची से बचें, दहेज प्रथा से दूरी बनाएं और बच्चों को अच्छी शिक्षा देकर काबिल बनाएं। साथ ही जरूरतमंदों की मदद करने पर भी जोर दिया।

मगरिब के समय सामूहिक रोजा इफ्तार का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में रोजेदारों ने एक साथ इफ्तार किया। मगरिब की नमाज के बाद रंग शरीफ की महफिल सजी और इशा की नमाज के बाद गुस्ल शरीफ व महफिल-ए-समां देर रात तक जारी रही। इसके साथ ही तीन दिवसीय उर्स का समापन हो गया।

इस मौके पर नायब सज्जादानशीन ख्वाजा सलमान अहमद नासिरी, ख्वाजा शायान हसन नासिरी, ख्वाजा वसीम अहमद नासिरी, सूफी वसीम मियां नासिरी साबरी, पम्मी खान वारसी, साबिर नासिरी, शाहिद रजा नूरी, फहीम यार खान, सरबत अली, सलमान, नन्ना मियां, मोहम्मद शाहिद कुरैशी समेत बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।

यह उर्स अमन, भाईचारे और रूहानी सादगी का संदेश देता हुआ संपन्न हुआ, जो बरेली की सूफी परंपरा की एक खूबसूरत मिसाल माना जाता है।

Saurabh Gupta
Author: Saurabh Gupta