होली पर सफर हुआ मुश्किल: स्पेशल ट्रेनों का महंगा किराया, नियमित सेवाओं में सीट के लिए जंग

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होली पर सफर हुआ मुश्किल: स्पेशल ट्रेनों का महंगा किराया, नियमित सेवाओं में सीट के लिए जंग

रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता

बरेली। रंगों के त्योहार पर अपनों तक पहुंचने की चाह इस बार यात्रियों पर भारी पड़ती दिख रही है। भीड़ संभालने के दावों के बीच सोमवार को भी जंक्शन और बस अड्डों पर हालात बेकाबू रहे। नियमित ट्रेनों और रोडवेज बसों में सीट के लिए मारामारी मची रही, जबकि स्पेशल ट्रेनों और बसों का बढ़ा हुआ किराया यात्रियों की जेब पर बोझ बन गया है।

जंक्शन पर अफरातफरी, कतारों में बीता दिन

सुबह होते ही टिकट खिड़कियों पर लंबी लाइनें लग गईं। प्लेटफॉर्म पर पैर रखने तक की जगह नहीं बची। पूर्वोत्तर और उत्तर रेलवे की करीब 50 स्पेशल ट्रेनें बरेली होकर चलाई जा रही हैं, लेकिन इनमें अधिक किराया होने से यात्रियों का रुझान कम दिखा। नतीजा यह कि स्पेशल ट्रेनों में सीटें खाली रहीं, जबकि नियमित ट्रेनों में खड़े होकर सफर करने को लोग मजबूर नजर आए।

दोपहर और शाम के समय भी भीड़ का दबाव कम नहीं हुआ। दिल्ली, लखनऊ, शाहजहांपुर और गोरखपुर रूट की ट्रेनों में खासा दबाव देखा गया।

रोडवेज में रूट बदलने की शिकायत

बरेली रीजन में 650 से ज्यादा रोडवेज बसें संचालित हैं। अतिरिक्त फेरे और प्रोत्साहन राशि की घोषणा के बावजूद अव्यवस्था थमती नजर नहीं आई। यात्रियों का आरोप है कि कुछ बसों के चालक-परिचालक तय रूट की जगह लंबा रास्ता पकड़ रहे हैं, जिससे किराया और समय दोनों बढ़ रहे हैं।

सोमवार सुबह बीसलपुर-बिलसंडा-बंडा-खुटार होते हुए पलिया जाने वाली बस में बैठी बंडा तक की सवारियों को बीच रास्ते उतार दिया गया। बाद में बस को पूरनपुर-खुटार मार्ग से चलाने की बात कही गई। इस बदलाव से यात्रियों को 50 से 60 रुपये तक अतिरिक्त किराया देना पड़ा।

कम दूरी की सवारियों को नहीं मिल रही जगह

कुछ रूटों पर कम दूरी की सवारियों को बैठाने से इनकार करने की शिकायतें भी सामने आईं। लंबी दूरी के यात्रियों को प्राथमिकता दी जा रही है। सेटेलाइट बस अड्डे पर यात्रियों की भीड़ उमड़ी रही, जबकि पुराना बस अड्डा अपेक्षाकृत खाली दिखाई दिया।

दिल्ली से बरेली आने वाली बसों और ट्रेनों में भारी भीड़ है, मगर बरेली से दिल्ली जाने वाली कई सेवाएं खाली रवाना हो रही हैं। ऐसे में यात्री व्यवस्था को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

प्रशासन के दावे बनाम जमीनी हकीकत

त्योहार पर सुचारु यातायात के दावों के बीच जमीनी हालात अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं। यात्रियों का कहना है कि अतिरिक्त सेवाओं के बावजूद समन्वय की कमी और किराये की ऊंची दरों ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

Saurabh Gupta
Author: Saurabh Gupta