
आस्था का विराट उत्सव: बाबा त्रिवटीनाथ धाम में माँ भवानी मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा सम्पन्न
रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता
बरेली। प्राचीन एवं आस्था के केंद्र बाबा त्रिवटीनाथ मन्दिर परिसर में जगदजननी माँ भवानी के नव-निर्मित दिव्य मंदिर की पंचदिवसीय प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का समापन रविवार को अद्भुत श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और 108 दीपों की ज्योति से पूरा परिसर भक्तिरस में सराबोर हो उठा।
भक्तों की वर्षों पुरानी इच्छा हुई पूर्ण, 13 माह में साकार हुआ संकल्प
मीडिया प्रभारी संजीव औतार अग्रवाल ने बताया कि मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की लंबे समय से मांग थी कि माँ भवानी का पृथक मंदिर बनाया जाए। अब तक माँ नवदुर्गा का स्वरूप शिवालय में विराजमान था, जिससे श्रद्धालु अलग मंदिर की कामना कर रहे थे।
मंदिर सेवा समिति ने भक्तों की भावना को सम्मान देते हुए 15 जनवरी को विधिवत आधारशिला रखी थी। लगभग 13 माह की अथक मेहनत और जनसहयोग से भव्य मंदिर निर्माण पूर्ण हुआ। नवीन मंदिर की भव्यता और दिव्यता देखते ही बनती है।
हवन, दुर्गा सप्तशती पाठ और वैदिक विधि से हुई प्राण प्रतिष्ठा
पंचम दिवस का शुभारंभ यज्ञशाला में हवन से हुआ। इसके पश्चात दुर्गा सप्तशती पाठ, पूजन-अर्चन तथा वैदिक रीति से माँ भवानी की प्रतिमा में प्राण प्रतिष्ठा सम्पन्न कराई गई।
सिंहवाहिनी स्वरूप में आशीर्वाद मुद्रा में विराजमान माँ भवानी की प्रतिमा अत्यंत मनोहारी दिखाई दी। दर्शन करते ही श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और “जय माता दी” के उद्घोष से पूरा परिसर गूंजायमान हो गया।
108 दीपों की महाआरती से गुंजायमान हुआ मंदिर परिसर
महाआरती के समय 108 दीपों की प्रकाश ज्योति और 108 घंटियों की मधुर ध्वनि ने वातावरण को अलौकिक बना दिया। शंखनाद और जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनकर आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति की।
कार्यक्रम में मेयर उमेश गौतम, पूर्व विधायक राजेश मिश्रा पप्पू भरतौल तथा एसपी मानुष पारीक सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
आयोजन को सफल बनाने में प्रताप चंद्र सेठ, सुभाष मेहरा, हरिओम अग्रवाल, अरुण गुप्ता, ब्रजेश शर्मा, विनय कृष्ण अग्रवाल, कृष्णा अग्रवाल, नवीन गोयल और विकास शिंघल सहित समिति सदस्यों का विशेष योगदान रहा।
इस ऐतिहासिक आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को नई ऊंचाई दी, बल्कि बरेली की आध्यात्मिक पहचान को भी सुदृढ़ किया। माँ भवानी की कृपा से नगर में सुख-शांति और समृद्धि की कामना की गई।