“योगी आदित्यनाथ पर टिप्पणी से पहले हेमंत और धामी को देखें – मौलाना शहाबुद्दीन”

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“योगी आदित्यनाथ पर टिप्पणी से पहले हेमंत और धामी को देखें – मौलाना शहाबुद्दीन”

“योगी पर बयान से पहले सोच लें नेता, मौलाना शहाबुद्दीन का तीखा सवाल”

“असम–उत्तराखंड की मिसाल देकर योगी सरकार का बचाव, मौलाना का बड़ा बयान”

“यूपी में एक भी मस्जिद नहीं गिरी, फिर क्यों योगी निशाने पर?”

रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता

बरेली! उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर सियासी बयानबाज़ी तेज़ होती जा रही है। इसी बीच मौलाना शहाबुद्दीन का एक बड़ा और चर्चा में रहने वाला बयान सामने आया है, जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। मौलाना शहाबुद्दीन ने पूर्व सांसद सफीक उर रहमान के बेटे जिया उर रहमान वर्क की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी भी नेता को योगी आदित्यनाथ पर सवाल उठाने से पहले देश के दूसरे राज्यों की स्थिति पर भी नज़र डालनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा के कार्यकाल में कई मस्जिदों और मदरसों पर कार्रवाई हुई, वहीं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के शासन में भी अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्त कदम उठाए गए, जिनमें मस्जिद और मदरसे शामिल रहे। इसके उलट उत्तर प्रदेश की बात करें तो योगी आदित्यनाथ के लंबे शासनकाल में ऐसी कोई मिसाल नहीं मिलती, जहां किसी मस्जिद या मदरसे को गिराया गया हो।

मौलाना शहाबुद्दीन ने साफ शब्दों में कहा कि केवल योगी आदित्यनाथ को ही कटघरे में खड़ा करना सही नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कानून व्यवस्था और अवैध निर्माण के नाम पर कार्रवाई की बात है, तो फिर दूसरे राज्यों पर चुप्पी क्यों?

उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे योगी सरकार के समर्थन के रूप में देख रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह बयान सियासी बहस को और तेज कर सकता है। फिलहाल, मौलाना शहाबुद्दीन का यह बयान योगी आदित्यनाथ को लेकर चल रही राजनीति में नया मोड़ लेकर आया है।

Saurabh Gupta
Author: Saurabh Gupta