
रिठौरा में नशे का तांडव: 16 साल के समीर की चाकू गोदकर हत्या, दिल्ली ले जाते वक्त रास्ते में तोड़ा दम
रिपोर्ट/सौरभ गुप्ता
बरेली। जिले का रिठौरा कस्बा अब नशे के सौदागरों का सुरक्षित गढ़ बनता जा रहा है। स्मैक, गांजा, अफीम जैसे नशीले पदार्थों का कारोबार यहां खुलेआम फल-फूल रहा है और इसकी सबसे बड़ी कीमत मासूम बच्चे और युवा चुका रहे हैं। नशे में डूबे बदमाशों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि अब मामूली विवाद भी हत्या में बदल रहा है। इसी काली हकीकत की भेंट चढ़ गया महज 16 साल का निर्दोष किशोर समीर अहमद।
30/31 जनवरी 2026 की रात करीब साढ़े दस बजे समीर अपने दोस्त अर्स के साथ बाइक से सामान खरीदकर लौट रहा था। जैसे ही वह नरेश किराना दुकान के पास पहुंचा, वहां पहले से मौजूद चार नशेड़ी युवकों—आरिफ पुत्र नासिर, जाकिर पुत्र नासिर (दोनों निवासी वार्ड 4, इंद्रापुरी), अयान पुत्र आदिल (वार्ड 2, नई बस्ती) और करन सिंह पुत्र सठरू लाल यादव (वार्ड 2, नवदिया)—ने उसे घेर लिया। बाइक चलाने के तरीके को लेकर गाली-गलौज शुरू हुई, फिर जान से मारने की धमकियां दी गईं।
विरोध करने पर तीन आरोपियों ने समीर को पकड़ लिया और आरिफ ने जान लेने की नीयत से चाकू से ताबड़तोड़ वार कर दिए। खून से लथपथ समीर को सड़क पर छोड़कर हमलावर फरार हो गए। इस खौफनाक वारदात को शाहिल पुत्र हाफिज अहमद और नौसाद पुत्र अनीस अहमद ने अपनी आंखों से देखा।
परिजन गंभीर हालत में समीर को ओमेगा अस्पताल ले गए, जहां से उसे राममूर्ति अस्पताल, भोजीपुरा रेफर किया गया। डॉक्टरों ने अत्यधिक रक्तस्राव के कारण हालत नाजुक बताई। परिवार आखिरी उम्मीद लेकर उसे दिल्ली के बड़े अस्पताल ले जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही समीर की सांसें थम गईं। एक मासूम जिंदगी, एक परिवार का सपना हमेशा के लिए खत्म हो गया।
यह केवल एक हत्या नहीं, बल्कि रिठौरा में फैले नशे के अवैध कारोबार का खौफनाक परिणाम है। कस्बे में नशे के अड्डे खुलेआम चल रहे हैं, युवा लाइन लगाकर जहर खरीद रहे हैं और नशेड़ी टोलियां अपराध की नई सीमाएं लांघ चुकी हैं मारपीट, लूट और अब हत्या। पुलिस की छापेमारी के बावजूद नशा माफिया की जड़ें जस की तस बनी हुई हैं।
मृतक समीर के पिता शरीफ अहमद ने थाने में तहरीर देकर चारों आरोपियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराने की मांग की है। लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ मुकदमा काफी है? क्या प्रशासन नशे के इस कारोबार को जड़ से खत्म करने का साहस दिखाएगा?

परिवार गम में डूबा है, पूरा कस्बा दहशत में है। अब मांग उठ रही है कि रिठौरा में तत्काल विशेष अभियान चलाया जाए, नशा तस्करों पर गैंगस्टर एक्ट लगाया जाए और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।
समीर अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसकी मौत प्रशासन और समाज दोनों के लिए एक सख्त चेतावनी है—अगर अभी नहीं रोका गया, तो नशे की यह आग हर घर तक पहुंचेगी।