
बजट से ज्वैलर्स निराश, सोना-चांदी कारोबार को नहीं मिली कोई राहत : अनिल पाटिल
महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा है गहना, कीमतों की अस्थिरता से आम ग्राहक हुऐ दूर : अनिल पाटिल
रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता
नई दिल्ली। केंद्रीय बजट से देशभर के सोना-चांदी व्यापारियों को बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन बजट में इस परंपरागत और संवेदनशील कारोबार के लिए कोई ठोस घोषणा नहीं की गई। इससे ज्वैलर्स वर्ग में निराशा है। सोना-चांदी केवल आभूषण नहीं, बल्कि भारतीय समाज में नारी की सुरक्षा, आत्मसम्मान और पारिवारिक भविष्य से गहराई से जुड़ा हुआ है।
ग्रामीण भारत में आज भी गहना आपातकालीन जरूरतों का सबसे भरोसेमंद साधन माना जाता है। कई परिवारों में यह महिलाओं का एकमात्र आर्थिक सहारा होता है, जो संकट के समय काम आता है। ऐसे में इस क्षेत्र की अनदेखी चिंता बढ़ाने वाली है।
पिछले एक वर्ष में सोने की कीमतों में करीब 100 प्रतिशत और चांदी में लगभग 300 प्रतिशत तक उछाल आया है। लगातार बढ़ते दामों के कारण आम आदमी के लिए सोना-चांदी खरीदना मुश्किल हो गया है। हालात यह हैं कि एक ही दिन में चांदी के भाव में एक-एक लाख रुपये तक का उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, जिससे व्यापारी और ग्राहक दोनों असमंजस में हैं।
व्यापारियों का कहना है कि सोना-चांदी का बाजार पूरी तरह कमोडिटी ट्रेडिंग के हवाले हो गया है। MCX पर अत्यधिक सट्टेबाजी के चलते भाव अस्थिर हो रहे हैं। मांग की जा रही है कि कमोडिटी बाजार पर नियंत्रण लगे, ताकि देशभर में भावों में एकरूपता आए और बाजार में स्थिरता बनी रहे। भाव स्थिर होंगे तभी ग्राहक लौटेगा।
इसके साथ ही जीएसटी प्रावधानों को सरल बनाने की भी जरूरत है, जिससे छोटे व्यापारी आसानी से कर व्यवस्था के दायरे में आ सकें। हालांकि, बजट के कुछ फैसलों की सराहना भी की जा रही है, लेकिन सोना-चांदी व्यापार से जुड़े मुद्दों पर सरकार से भविष्य में ठोस कदम उठाने की उम्मीद बनी हुई है।