
कानूनी घेरे के बीच आजम खां परिवार ने जौहर ट्रस्ट से बनाई दूरी, अब नई टीम के हवाले हुई कमान
कानूनी उलझनों के बीच आजम खां परिवार ने छोड़ा जौहर ट्रस्ट, नई कार्यकारिणी का हुआ ऐलान
आजम खां का बड़ा फैसला: जौहर ट्रस्ट से अलग हुआ परिवार, बहन निकहत अफलाक को सौंपी कमान
जौहर ट्रस्ट में बड़ा फेरबदल: आजम खां परिवार बाहर, बड़े बेटे अदीब आजम बने सचिव
रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता
रामपुर। लगातार बढ़ते कानूनी संकट के बीच समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां और उनके परिवार ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से खुद को अलग कर लिया है। ट्रस्ट से जुड़े पदों से इस्तीफे के बाद अब इसका संचालन नई कार्यकारिणी के हाथों में सौंप दिया गया है।



मिली जानकारी के अनुसार सपा के राष्ट्रीय महासचिव आजम खां, उनकी पत्नी एवं पूर्व सांसद डॉ. तजीन फात्मा और सपा के पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम ने ट्रस्ट की प्राथमिक सदस्यता छोड़ दी है। इसके बाद ट्रस्ट की संरचना में बड़ा बदलाव करते हुए नई कार्यकारिणी का गठन किया गया।

नई व्यवस्था के तहत आजम खां की बहन निकहत अफलाक को ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि उनके बड़े बेटे मोहम्मद अदीब आजम को सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

गौरतलब है कि इससे पहले मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के अध्यक्ष पद पर स्वयं आजम खां थे और सचिव की भूमिका में डॉ. तजीन फात्मा कार्यरत थीं। वहीं उनके दोनों बेटे अदीब आजम और अब्दुल्ला आजम ट्रस्ट के सदस्य थे।
यह ट्रस्ट आजम खां के महत्वाकांक्षी शैक्षिक प्रोजेक्ट माने जाने वाले जौहर यूनिवर्सिटी और रामपुर पब्लिक स्कूल के संचालन का जिम्मा संभालता है।

सूत्रों का कहना है कि ट्रस्ट से जुड़े मामलों में इस समय 30 से अधिक मुकदमे विभिन्न अदालतों में विचाराधीन हैं। पूर्व में जब आजम खां, उनकी पत्नी और बेटे अब्दुल्ला आजम जेल में थे, तब ट्रस्ट के प्रशासनिक संचालन को लेकर कई व्यावहारिक चुनौतियां सामने आई थीं।
इन्हीं परिस्थितियों और कानूनी जटिलताओं को ध्यान में रखते हुए ट्रस्ट के प्रबंधन में बदलाव का फैसला लिया गया।
जौहर यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार एस.एन. सलाम ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि अब ट्रस्ट की पूरी जिम्मेदारी निकहत अफलाक के पास है, जबकि मोहम्मद अदीब आजम सचिव के रूप में कार्यभार संभालेंगे।

27 जनवरी को होगी अपील पर सुनवाई
उधर, दो पैन कार्ड मामलों में सजा काट रहे आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम की अपील पर गुरुवार को सुनवाई नहीं हो सकी। अब इस मामले में 27 जनवरी को एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट में सुनवाई तय की गई है।
गौरतलब है कि मजिस्ट्रेट कोर्ट ने हाल ही में दोनों को सात-सात साल की सजा और 50-50 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया था। इस फैसले के खिलाफ जहां बचाव पक्ष ने सजा निरस्त करने की अपील दाखिल की है, वहीं अभियोजन पक्ष ने सजा बढ़ाने की मांग करते हुए उच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया है।