
‘ट्रंप उठा सकता है राष्ट्रपति, तो मोदी क्यों नहीं उठा सकते आतंकी?’ ओवैसी का सीधा हमला
रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा और सनसनीखेज हमला बोलते हुए आतंकवाद के मुद्दे पर सरकार की नीति पर सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने कहा कि जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वेनेजुएला जैसे संप्रभु देश के राष्ट्रपति को गिरफ्तार कर सकते हैं, तो भारत उन आतंकियों को क्यों नहीं पकड़ सकता, जो देश में खून-खराबा फैलाकर खुलेआम विदेशों में घूम रहे हैं।
ओवैसी का यह बयान राजनीतिक हलकों में हलचल मचाने वाला साबित हो रहा है।
56 इंच का सीना है तो दिखाइए ताकत, आतंकियों को भारत लाइए
ओवैसी ने प्रधानमंत्री मोदी के चर्चित “56 इंच के सीने” वाले बयान को लेकर तंज कसते हुए कहा कि अगर इतना ही मजबूत नेतृत्व है, तो पाकिस्तान में छिपे आतंकियों को उठाकर भारत क्यों नहीं लाया जाता। उन्होंने कहा कि सिर्फ भाषणों और चुनावी नारों से देश सुरक्षित नहीं होता, बल्कि ठोस कार्रवाई की जरूरत होती है।
ओवैसी ने इशारों-इशारों में 26/11 जैसे आतंकी हमलों के गुनहगारों का जिक्र करते हुए कहा कि आज भी कई आतंकवादी भारत से बाहर सुरक्षित बैठे हैं और सरकार उन्हें पकड़ने में नाकाम रही है।
वेनेजुएला ऑपरेशन बना मिसाल, भारत की विदेश नीति पर उठे सवाल
ओवैसी ने अमेरिकी कार्रवाई का हवाला देते हुए कहा कि जब अमेरिका अपनी ताकत का इस्तेमाल कर किसी दूसरे देश में ऑपरेशन कर सकता है, तो भारत क्यों पीछे हटता है। उन्होंने सवाल किया कि क्या भारत की विदेश नीति इतनी कमजोर है कि वह अपने दुश्मनों को सज़ा तक नहीं दिला सकती।
उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद केवल भाषणों से खत्म नहीं होता, बल्कि उसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साहसिक फैसले लेने पड़ते हैं। ओवैसी ने केंद्र सरकार से स्पष्ट नीति और ठोस रणनीति सामने रखने की मांग की।
चुनावी माहौल में बयान से बढ़ी सियासी गर्मी
ओवैसी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में चुनावी माहौल गर्म है। उनके बयान को विपक्ष द्वारा केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं, सत्ताधारी दल के समर्थकों ने इसे गैर-जिम्मेदाराना और देश की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला बयान बताया है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि ओवैसी के इस बयान से आतंकवाद, विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे एक बार फिर बहस के केंद्र में आ गए हैं। आने वाले दिनों में इस पर सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।