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बरेली कैफे कांड: गिलास चोर से लेकर भूमिगत नेता तक-मुख्य आरोपी ऋषभ ठाकुर की तलाश में जुटी एसओजी टीम

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बरेली कैफे कांड: गिलास चोर से लेकर भूमिगत नेता तक-मुख्य आरोपी ऋषभ ठाकुर की तलाश में जुटी एसओजी टीम

रिपोर्ट/ सौरभ गुप्ता

बरेली। शहर के राजेंद्र नगर स्थित डेन कैफे में छात्रा की बर्थडे पार्टी के दौरान हुई मारपीट और तोड़फोड़ के मामले ने अब सियासी और सांप्रदायिक रंग ले लिया है।

पुलिस जहां छह आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, वहीं मुख्य आरोपी ऋषभ ठाकुर अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर है।

उसकी गिरफ्तारी के लिए एसएसपी अनुराग आर्य ने एसओजी की दो टीमें और प्रेमनगर व सुभाषनगर थानों की पुलिस को लगाया है।

पुलिस के अनुसार, ऋषभ ठाकुर कोई नया नाम नहीं है। वह शातिर अपराधी है और उस पर पहले से चोरी व जानलेवा हमले के कई मुकदमे दर्ज हैं।

अगस्त में उसे जिला बदर घोषित किया जा चुका है, लेकिन आज तक वह पुलिस के हाथ नहीं लगा। जुलाई में चोरी के एक मामले में उसे जेल भी भेजा जा चुका है।

स्थानीय स्तर पर उसे “गिलास चोर” के नाम से भी जाना जाता है, लेकिन खुद को वह तथाकथित बजरंग दल का नेता बताता रहा है।

कैफे कांड के बाद सीसीटीवी फुटेज सामने आने से घबराया ऋषभ ठाकुर अब भूमिगत हो चुका है।

पुलिस की सख्ती बढ़ते ही उसने भगवा गमछा डालकर एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया, जिसमें खुद को निर्दोष बताते हुए धार्मिक कार्ड खेलने की कोशिश की गई।

वीडियो में उसने दावा किया कि दूसरे समुदाय के लड़कों के साथ छात्रा को देखकर विरोध किया गया था और कोई गलत काम नहीं हुआ।

पुलिस इस वीडियो को भी जांच का हिस्सा मान रही है।

इस बीच बजरंग दल के सह विभाग संयोजक आर्यन चौधरी द्वारा सोशल मीडिया पर सीओ प्रथम को घेरने की कोशिश ने मामले को और गरमा दिया है। सोशल मीडिया पर घटना को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है.

कुछ लोग पुलिस कार्रवाई को सही ठहरा रहे हैं, तो कुछ आरोपी के पक्ष में खड़े नजर आ रहे हैं।

सुभाषनगर थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह ने साफ कहा कि ऋषभ ठाकुर जिला बदर होने के बावजूद खुलेआम घूमता रहा और अब फरार है।

उसका परिवार मढ़ीनाथ क्षेत्र में किराये के मकान में रहता है, जिस कारण नोटिस चस्पा करने में भी तकनीकी दिक्कतें हैं। पुलिस उसके करीबियों पर दबाव बनाकर ठिकाने की जानकारी जुटा रही है।

एसएसपी अनुराग आर्य ने दो टूक कहा है कि कैफे में अगर कुछ आपत्तिजनक हो रहा था तो उसकी सूचना पुलिस को दी जा सकती थी।

कानून हाथ में लेने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस पूरी मजबूती से चार्जशीट दाखिल करेगी।

अब सवाल यह है कि सफेद नकाबपोश साए में छिपा ऋषभ ठाकुर कब तक पुलिस से बच पाएगा—जवाब तलाशने में पूरा सिस्टम जुटा है।

Saurabh Gupta
Author: Saurabh Gupta