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खानकाह-ए-नियाजिया में अकीदत का सैलाब, ख्वाजा गरीब नवाज के कुल शरीफ में उमड़ा जनसमूह

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खानकाह-ए-नियाजिया में अकीदत का सैलाब, ख्वाजा गरीब नवाज के कुल शरीफ में उमड़ा जनसमूह

 रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता 

बरेली। ख्वाजा-ए-ख्वाजागान हज़रत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती (रह.) के कुल मुबारक के अवसर पर 27 दिसंबर को खानकाह-ए-नियाजिया स्थित क़ुतुब-ए-आलम मौलाना शाह नियाज़ अहमद साहब (रह.) की दरगाह पर रूहानियत और अकीदत का अनोखा नज़ारा देखने को मिला। सैकड़ों वर्षों से चली आ रही इस परंपरा के तहत सुबह ठीक 10 बजे कुल शरीफ की रस्म अदा की गई।

इस ऐतिहासिक परंपरा का उद्देश्य उन अकीदतमंदों को आध्यात्मिक जुड़ाव प्रदान करना है, जो किसी कारणवश अजमेर शरीफ जाकर ख्वाजा गरीब नवाज की बारगाह में हाज़िरी नहीं दे पाते। ऐसे ज़ायरीन खानकाह-ए-नियाजिया आकर अपने दिली अरमानों के साथ ज़ियारत मुकम्मल करते हैं। सुबह से ही दरगाह परिसर और आसपास के क्षेत्रों में ज़ायरीनों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

कुल शरीफ के मौके पर साहबजादा असकारी मियां नियाजी सहित तमाम अकीदतमंदों ने मजार-ए-पाक पर चादरपोशी और गुलपोशी कर अमन, चैन और खुशहाली की दुआएं मांगीं। कार्यक्रम की शुरुआत कुरानख्वानी से हुई, जिसमें मदरसा-ए-आलिया नियाजिया के छात्रों और उलेमा ने भाग लिया। इसके बाद नात-ओ-मनक़बत, सलातो-सलाम और सूफियाना कलाम ने माहौल को पूरी तरह रूहानी बना दिया।

शाम के समय आयोजित महफिल-ए-समा (कव्वाली) में देश के मशहूर कव्वालों और शायरों ने ख्वाजा गरीब नवाज की शान में कलाम पेश कर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। बड़ी संख्या में गैर-मुस्लिम श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने ख्वाजा साहब के प्रेम, इंसानियत और भाईचारे के संदेश को और मजबूत किया।

कुल शरीफ की रस्म साहबजादा असकारी मियां नियाजी की सदारत में अदा की गई। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि ख्वाजा गरीब नवाज का संदेश मजहब से ऊपर उठकर पूरी मानवता को जोड़ने का है और यही उनकी सच्ची विरासत है।

कार्यक्रम के समापन पर सभी ज़ायरीनों के लिए लंगर का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। बेहतर सुरक्षा और व्यवस्था के लिए खानकाह प्रबंधन ने जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन का आभार व्यक्त किया।

Saurabh Gupta
Author: Saurabh Gupta