माफिया अशरफ के खास मददगार लल्ला गद्दी को जिला स्तर का माफिया घोषित!
रिपोर्ट/सौरभ गुप्ता
बरेली में 10 मुकदमों की चपेट में फंसा अपराधी, उमेश पाल हत्याकांड के तार जुड़े
बरेली: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में अपराध की दुनिया में एक और सनसनीखेज मोड़ आया है। माफिया अतीक अहमद के भाई और कुख्यात अपराधी अशरफ का करीबी सहयोगी लल्ला गद्दी अब आधिकारिक तौर पर जिला स्तर का माफिया घोषित कर दिया गया है।
बरेली के एसएसपी अनुराग आर्य ने इस फैसले पर मुहर लगाई है, जो लल्ला गद्दी के अपराधी साम्राज्य पर कड़ी चोट है। इस घोषणा से बरेली की गैंगस्टर गतिविधियां फिर सुर्खियों में हैं, जहां लल्ला पर हत्या, रंगदारी, गैंगस्टर एक्ट समेत कुल 10 मुकदमे दर्ज हैं।
क्या यह अपराध की जड़ों पर प्रहार है या सिर्फ एक दिखावा? आइए खुलासा करते हैं इस काले कारनामों की कहानी को।
लल्ला गद्दी, जो थाना बारादरी इलाके के चक महमूद का निवासी है, लंबे समय से अपराध की दुनिया में सक्रिय रहा है।
लेकिन उसकी असली पहचान तब बनी जब वह माफिया अशरफ का विश्वसनीय मददगार साबित हुआ। याद कीजिए प्रयागराज का वह खौफनाक उमेश पाल हत्याकांड, जहां वकील उमेश पाल को दिनदहाड़े गोलियों से भून दिया गया था।
जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि इस हत्याकांड से पहले शूटरों की मुलाकात बरेली जेल में बंद अशरफ से कराने में लल्ला गद्दी ने अहम भूमिका निभाई थी।
उसके दोस्त सद्दाम, जो अशरफ का साला है, के साथ मिलकर लल्ला ने यह साजिश रची। सद्दाम के पैसे बरेली की जमीनों में निवेश कराने से लेकर जेल में अशरफ को सहूलियत पहुंचाने तक, लल्ला की हरकतें पुलिस की रडार पर आ गईं।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, उमेश पाल हत्याकांड की जांच ने पूरे नेटवर्क को उजागर किया। लल्ला गद्दी और उसके साथियों को अशरफ की मदद करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
कई आरोपी जेल से रिहा हो चुके हैं, लेकिन लल्ला पर शिकंजा कसता जा रहा है। हाल ही में उस पर गुंडा एक्ट लगाया गया, और अब जिला स्तर का माफिया घोषित होने से उसकी संपत्तियां जब्त होने का खतरा मंडरा रहा है।
बारादरी और बिथरी चैनपुर थानों में दर्ज 10 मुकदमों में हत्या के प्रयास, रंगदारी वसूली, गैंगस्टर गतिविधियां और अन्य संगीन अपराध शामिल हैं। ये मुकदमे बताते हैं कि लल्ला सिर्फ एक छोटा-मोटा अपराधी नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह का सरगना है, जो बरेली की सड़कों से लेकर जेल की दीवारों तक अपना जाल फैलाए हुए था।
इस मामले ने जेल प्रशासन की पोल भी खोल दी। जांच में पता चला कि जेल अधिकारियों ने अशरफ को विशेष सुविधाएं दीं, जिसके चलते कई अफसरों पर कार्रवाई हुई।
लल्ला गद्दी की दोस्ती सद्दाम से कैसे बनी? सूत्र बताते हैं कि यह रिश्ता पैसे और पावर की लालच से उपजा।
सद्दाम के करोड़ों रुपये लल्ला ने बरेली की प्रॉपर्टी में लगाए, जो अब पुलिस की जांच के घेरे में हैं। क्या यह सिर्फ दोस्ती थी या एक बड़ा माफिया सिंडिकेट का हिस्सा? बरेली पुलिस का दावा है.
कि लल्ला के खिलाफ सख्त कार्रवाई से अपराध पर लगाम लगेगी, लेकिन सवाल यह है कि ऐसे कितने लल्ला गद्दी अभी भी छिपे हुए हैं?
उत्तर प्रदेश में माफिया राज के खिलाफ योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस पॉलिसी के तहत यह कार्रवाई हुई है।
लेकिन विपक्षी दल इसे राजनीतिक साजिश बता रहे हैं। लल्ला गद्दी की गिरफ्तारी से बरेली में हड़कंप मचा है, जहां स्थानीय लोग डर के साए में जी रहे हैं। क्या यह घोषणा अपराधियों को सबक सिखाएगी या सिर्फ कागजी कार्रवाई बनेगी?
पुलिस अब लल्ला की संपत्तियों की जांच कर रही है, जिसमें जमीनें, बैंक खाते और अन्य अवैध धन शामिल हैं।
इस घटनाक्रम से साफ है कि माफिया नेटवर्क कितना गहरा है। अशरफ जैसे कुख्यात अपराधी जेल से भी अपना खेल खेलते रहते हैं, और लल्ला जैसे मददगार उनके लिए पुल का काम करते हैं।
बरेली से प्रयागराज तक फैले इस साजिश ने पूरे राज्य को हिला दिया है। अगर पुलिस सख्ती से काम करे, तो ऐसे गिरोहों का सफाया संभव है। लेकिन सवाल बाकी है- क्या लल्ला गद्दी आखिरी कड़ी है या अभी और खुलासे होने बाकी हैं?
बरेली की जनता अब राहत की सांस ले रही है, लेकिन अपराध की जड़ें इतनी आसानी से उखड़ती नहीं। यह खबर चेतावनी है कि अपराध की दुनिया में कोई सुरक्षित नहीं।