
जॉर्डन यात्रा के बहाने फिर चर्चा में भारत–जॉर्डन के रिश्ते, शाही परिवार का भारत से पुराना नाता
रिपोर्ट: सौरभ गुप्ता
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जॉर्डन यात्रा ने एक बार फिर भारत और हाशमाइट किंगडम ऑफ जॉर्डन के बीच गहरे और ऐतिहासिक संबंधों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। इस यात्रा के दौरान न सिर्फ कूटनीतिक और रणनीतिक मुद्दों पर बातचीत हुई, बल्कि दोनों देशों के बीच मानवीय और सांस्कृतिक जुड़ाव भी सामने आया।
सोमवार को अम्मान स्थित अल-हुसैनिया पैलेस में प्रधानमंत्री मोदी और जॉर्डन के सम्राट किंग अब्दुल्ला द्वितीय बिन अल-हुसैन के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की अहम बैठक हुई। इस बैठक में द्विपक्षीय सहयोग, पश्चिम एशिया की क्षेत्रीय स्थिरता, आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति और आपसी विश्वास को और मजबूत करने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
कूटनीति से आगे, दिलों का रिश्ता
सरकारी बैठकों से इतर जॉर्डन के शाही परिवार का भारत से एक बेहद खास और भावनात्मक जुड़ाव भी है। यह संबंध जॉर्डन की प्रतिष्ठित शख्सियत राजकुमारी सरवत अल-हसन से जुड़ा हुआ है, जिनकी जड़ें भारत में हैं।
भारत में जन्म, जॉर्डन की राजकुमारी
राजकुमारी सरवत अल-हसन का जन्म वर्ष 1947 में तत्कालीन कलकत्ता (अब कोलकाता) में सरवत इकरामुल्ला के रूप में हुआ था। उनका जन्म भारत के विभाजन से कुछ ही सप्ताह पहले हुआ, ऐसे समय में जब उपमहाद्वीप ऐतिहासिक बदलावों से गुजर रहा था।
प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक
सरवत इकरामुल्ला एक प्रभावशाली और शिक्षित परिवार से आती हैं। उनके पिता मोहम्मद इकरामुल्ला भारतीय सिविल सेवा के वरिष्ठ अधिकारी थे और बाद में पाकिस्तान के पहले विदेश सचिव बने। वहीं उनकी माता शैस्ता सुहरावर्दी इकरामुल्ला पाकिस्तान की पहली महिला सांसदों में शामिल रहीं और मोरक्को में राजदूत के रूप में भी सेवाएं दीं।
शिक्षा और महिला सशक्तिकरण में अहम योगदान
जॉर्डन में राजकुमारी सरवत अल-हसन ने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। खासकर महिलाओं और युवाओं के सशक्तिकरण को लेकर उनके प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा जाता है। उनका जीवन भारत और जॉर्डन के बीच सांस्कृतिक सेतु का प्रतीक माना जाता है।
भारत–जॉर्डन संबंधों की मजबूत नींव
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा न केवल रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है, बल्कि यह भी दिखाती है कि भारत और जॉर्डन के रिश्ते सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और मानवीय जुड़ाव से भी गहराई से जुड़े हुए हैं।