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दिल्ली हादसे के बाद भी नहीं जाग रहा बरेली! 65 साल पुरानी दीवार मौत को दे रही दावत, आधा दर्जन मकान खतरे में

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दिल्ली हादसे के बाद भी नहीं जाग रहा बरेली! 65 साल पुरानी दीवार मौत को दे रही दावत, आधा दर्जन मकान खतरे में

कब ढहेगी शंकर मिल की जर्जर दीवार? झुककर खड़ी 65 साल पुरानी दीवार से सहमे लोग, नगर निगम बेखबर

बीती रात दीवार से आई डरावनी आवाज, रात में घरों से बाहर भागे लोग; बरेली में बड़े हादसे का खतरा

कुतुबमीनार से ज्यादा झुकी शंकर मिल की दीवार! दीवार से आधा दर्जन मकानों पर मंडरा रहा गंभीर संकट, शंकर मिल की जर्जर दीवार से मंडराया खतरा

दिल्ली हादसे के बाद भी नहीं जागा बरेली! 65 साल पुरानी दीवार मौत को दे रही दावत, आधा दर्जन मकान खतरे में

रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता 

बरेली। दिल्ली में इमारत हादसे की चर्चा अभी थमी भी नहीं है कि बरेली में एक जर्जर दीवार ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। बारादरी थाना क्षेत्र के मोहल्ला कोट में इरफान अस्पताल के बराबर वाली गली में शंकर मिल की करीब 65 साल पुरानी दीवार बेहद खतरनाक हालत में खड़ी बताई जा रही है। स्थानीय लोगों का दावा है कि दीवार काफी झुक चुकी है और उसके आसपास करीब आधा दर्जन मकान होने के कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

लोगों  के मुताबिक दीवार की हालत बहुत ज्यादा खराब हैऔर उस पर पुराना पीपल का पेड़ उग आने के कारण भी उक्त दीवार झुक गयीं है, दीवार के झुकने एवं कमजोर होने, गिरने के से आसपास रहने वाले परिवारों में भय का माहौल हैस्थानीय लोगों का कहना है कि रविवार रात दीवार की तरफ से अचानक तेज और अजीब आवाज सुनाई दी। आवाज सुनकर कई लोगों की नींद खुल गई और अनहोनी की आशंका में वे घरों से बाहर निकल आए।

 

मुकदमा अदालत में, खतरा लोगों की जान पर

 

स्थानीय लोगों के अनुसार शंकर मिल की जमीन/भवन को लेकर न्यायालय में मामला विचाराधीन है। यह भी बताया जा रहा है कि परिसर पर एक अधिवक्ता का कब्जा है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। लोगों का कहना है कि कानूनी विवाद अपनी जगह है, लेकिन जर्जर दीवार से आसपास रहने वाले परिवारों की सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

शिकायतों के बाद भी कार्रवाई का इंतजार

मोहल्ले के लोगों का आरोप है कि दीवार की खतरनाक स्थिति को लेकर कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि यदि समय रहते दीवार की जांच कराकर उसे सुरक्षित नहीं कराया गया तो किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।

लोगों में इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि प्रशासन किसी दुर्घटना के बाद ही क्यों जागता है। उनका कहना है कि हादसा होने के बाद मुआवजा और जांच से बेहतर है कि खतरे को पहले ही खत्म कर दिया जाए।

नगर निगम की चुप्पी पर सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि दीवार जिस स्थिति में खड़ी है, उसे देखकर किसी भी समय अनहोनी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। लोगों का आरोप है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद नगर निगम की ओर से प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।

मामले में नगर निगम प्रशासन से पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन कोई स्पष्ट और ठोस जवाब नहीं मिल सका। अब बड़ा सवाल यह है कि प्रशासन इस जर्जर दीवार को लेकर कब गंभीरता दिखाएगा—हादसा होने से पहले या हादसे के बाद?

Saurabh Gupta
Author: Saurabh Gupta