मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत का बड़ा दांव, अमेरिका से खरीदी 1.76 लाख टन LPG

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मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत का बड़ा दांव, अमेरिका से खरीदी 1.76 लाख टन LPG

गैस सप्लाई पर मंडराया खतरा, भारत ने अमेरिका की ओर बढ़ाया कदम

पश्चिम एशिया में तनाव, भारत ने बदली रणनीति—अमेरिका बना नया LPG सप्लायर

रिपोर्ट : नई दिल्ली ब्यूरो 

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक ईंधन बाजार पर साफ दिखने लगा है। गैस सप्लाई में अनिश्चितता के बीच भारत ने बड़ी रणनीतिक चाल चलते हुए अमेरिका से करीब 1.76 लाख टन एलपीजी (LPG) खरीद ली है।

रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के दिनों में भारत के एलपीजी आयात में गिरावट दर्ज की गई है। 19 मार्च को समाप्त सप्ताह में कुल आयात घटकर 2.65 लाख टन रह गया, जबकि इससे पहले यह आंकड़ा 3.22 लाख टन था। सबसे ज्यादा असर पश्चिम एशिया से आने वाली सप्लाई पर पड़ा है, जो घटकर केवल 89,000 टन रह गई—यह जनवरी 2026 के बाद का सबसे निचला स्तर है।

क्यों बढ़ी चिंता?

पेट्रोलियम सेक्टर के जानकारों का मानना है कि एलपीजी की उपलब्धता को लेकर स्थिति “चिंताजनक” बनती जा रही है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 60% एलपीजी आयात करता है, जिसमें से करीब 90% हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है। ऐसे में वहां की अस्थिरता सीधे भारत की रसोई तक असर डाल सकती है।

अमेरिका बना नया सहारा

संकट के बीच भारत अब तेजी से अपने आयात स्रोत बदल रहा है।

19 मार्च तक के सप्ताह में 1.76 लाख टन एलपीजी वैकल्पिक स्रोतों से आई, जिसमें बड़ा हिस्सा अमेरिका का रहा।

अनुमान है कि भारत 2026 में अमेरिका से 2.2 मिलियन टन तक एलपीजी आयात कर सकता है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, अमेरिका से कुछ गैस कार्गो भारत पहुंच भी चुके हैं, हालांकि उनकी संख्या सार्वजनिक नहीं की गई है।

अन्य देशों से भी बातचीत

भारत अब सिर्फ एक क्षेत्र पर निर्भर रहने के बजाय रूस, जापान और अन्य देशों से भी गैस आयात के विकल्प तलाश रहा है, ताकि भविष्य में सप्लाई बाधित न हो।

सप्लाई में समय का बड़ा फर्क

पश्चिम एशिया से गैस आने में: 7–8 दिन

अमेरिका से: करीब 45 दिन

रूस/जापान से: 35–40 दिन

यानी विकल्प तो हैं, लेकिन समय ज्यादा लगने से लॉजिस्टिक चुनौती भी बढ़ रही है! 

Saurabh Gupta
Author: Saurabh Gupta