बरेली में कमर्शियल गैस संकट: चूल्हे ठंडे, बाजार सूने, अंगीठी के सहारे जिंदा है कारोबार

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बरेली में कमर्शियल गैस संकट: चूल्हे ठंडे, बाजार सूने, अंगीठी के सहारे जिंदा है कारोबार

“गैस गायब, बरेली बेहाल: होटल बंद, चूल्हे ठंडे, सड़कों पर सन्नाटा”

“एलपीजी संकट ने छीना शहर का स्वाद: अंगीठी पर लौटे ढाबे, ठप पड़ा कारोबार”

“सिलेंडर की किल्लत या खेल? बरेली में गैस पर सियासत, बाजार में हाहाकार”

“रसोई बंद, रोजी संकट में: गैस न मिलने से बरेली के होटल-ढाबे हुए ठप”

“कोयले की आग पर टिके सपने: एलपीजी संकट से जूझता बरेली का कारोबार”

रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता 

बरेली। शहर में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की किल्लत ने अब गंभीर रूप ले लिया है। हालात ऐसे हैं कि होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों की रसोई ठंडी पड़ गई है। कई इलाकों में दुकानों पर ताले लटक गए हैं, जबकि जो खुले हैं, वे भी जुगाड़ के सहारे किसी तरह काम चला रहे हैं। गैस संकट ने न सिर्फ कारोबारियों की कमर तोड़ दी है, बल्कि हजारों लोगों की रोजी-रोटी पर भी संकट खड़ा कर दिया है।

चौराहों से बाजार तक पसरा सन्नाटा

नोवेल्टी, प्रेमनगर और मॉडल टाउन जैसे व्यस्त इलाकों में आम दिनों की रौनक गायब है। जहां कभी ग्राहकों की भीड़ उमड़ती थी, वहां अब वीरानी छाई है। शहर के कई चर्चित चाट और फास्ट फूड ठेले व रेस्टोरेंट बंद पड़े हैं। कारोबारियों का कहना है कि बिना गैस के दुकान खोलना घाटे का सौदा बन चुका है।

लकड़ी और कोयले के सहारे कारोबार

कुछ होटल संचालक मजबूरी में लकड़ी और कोयले की भट्टी का सहारा ले रहे हैं। लेकिन इससे न तो काम की रफ्तार बन पा रही है और न ही ग्राहकों की मांग पूरी हो रही है। धुएं और धीमी आंच के कारण खाना बनाना मुश्किल हो गया है, जिससे ग्राहक भी दूरी बना रहे हैं।

एक रेस्टोरेंट संचालक ने बताया कि गैस की सप्लाई जल्द बहाल नहीं हुई तो दुकान बंद करनी पड़ेगी। रोज कमाने-खाने वाले छोटे कारोबारियों के सामने सबसे बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

सालों पीछे लौटा कारोबार

गैस संकट ने शहर के फास्ट फूड कारोबार को वर्षों पीछे धकेल दिया है। अंगीठी और कोयले पर काम करना न सिर्फ कठिन है, बल्कि समय भी ज्यादा लेता है। इससे कमाई घट रही है और खर्च बढ़ रहा है।

कालाबाजारी के आरोप, प्रशासन पर सवाल

व्यापारियों ने गैस एजेंसियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि बाजार में कृत्रिम कमी पैदा कर सिलेंडर ऊंचे दामों पर बेचे जा रहे हैं। इससे कारोबारियों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो विरोध तेज हो सकता है।

‘इंतजार कीजिए’—अधिकारियों का जवाब

जिला पूर्ति विभाग का कहना है कि सप्लाई सामान्य करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन जमीनी हालात इससे अलग कहानी बयां कर रहे हैं। कारोबारियों का आरोप है कि उन्हें सिर्फ आश्वासन मिल रहा है, राहत नहीं।

Saurabh Gupta
Author: Saurabh Gupta