एम्स से लेकर गौशालाओं तक सरकार घिरी: आंवला सांसद नीरज मौर्य का तीखा हमला, मंत्री धर्मपाल पर इस्तीफे की मांग

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एम्स से लेकर गौशालाओं तक सरकार घिरी: आंवला सांसद नीरज मौर्य का तीखा हमला, मंत्री धर्मपाल पर इस्तीफे की मांग

रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता

बरेली। जनपद दौरे पर पहुंचे आंवला के सांसद Neeraj Maurya ने प्रदेश सरकार और मंत्रियों की कार्यशैली पर खुलकर सवाल उठाए। उन्होंने स्वास्थ्य सुविधाओं से लेकर गौशालाओं की दुर्दशा तक कई मुद्दों पर सरकार को घेरते हुए कहा कि जनता अब आश्वासन नहीं, बल्कि परिणाम चाहती है।

एम्स को लेकर सरकार पर सवाल

सांसद ने कहा कि बरेली जैसे बड़े जिले में उन्नत चिकित्सा सुविधाओं की सख्त जरूरत है, लेकिन एम्स की स्थापना का मुद्दा अब तक केवल “प्रयास जारी है” जैसे बयान तक सीमित है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब केंद्र और प्रदेश में एक ही दल की सरकार है, तो फिर वर्षों बाद भी ठोस निर्णय क्यों नहीं लिया गया?

उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार का दावा तभी सार्थक होगा, जब जमीन पर परिणाम दिखाई दें। केवल आश्वासन देकर जनता को संतुष्ट नहीं किया जा सकता।

गौशालाओं की बदहाली पर घेरा

प्रदेश की गौशालाओं में गायों की स्थिति पर चिंता जताते हुए सांसद ने सीधे पशुधन मंत्री Dharmapal Singh पर निशाना साधा। उनका आरोप है कि मंत्री के क्षेत्र के पास स्थित गौशाला में गायों की मौत की खबरें बेहद चिंताजनक हैं।

उन्होंने कहा कि यदि मंत्री के अपने क्षेत्र में ही व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं हैं, तो प्रदेश की अन्य गौशालाओं की हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है। सांसद ने यह भी जोड़ा कि यदि विकास कार्य वास्तव में होते हैं तो वे सार्वजनिक रूप से मंत्री को धन्यवाद देने को तैयार हैं, लेकिन वर्तमान हालात गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

नैतिक जिम्मेदारी और जांच की मांग

नीरज मौर्य ने कहा कि गौशाला प्रकरण में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और सच्चाई जनता के सामने लाई जानी चाहिए। यदि जांच में लापरवाही या कुप्रबंधन सामने आता है तो मंत्री को नैतिक आधार पर पद छोड़ देना चाहिए।

उन्होंने दो टूक कहा कि गौशालाओं में अव्यवस्था और पशुओं की मौत सरकार की नीतियों पर सवालिया निशान लगाती है, और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है।

सांसद के इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। अब देखना यह होगा कि सरकार इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और एम्स व गौशाला जैसे मुद्दों पर क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

Saurabh Gupta
Author: Saurabh Gupta