
इतिहास और मतांतरण पर नई बहस: मौलाना शहाबुद्दीन ने संघ प्रमुख के बयान का किया समर्थन
‘भारतीय मुसलमानों की जड़ें इसी मिट्टी में’ – मौलाना शहाबुद्दीन बोले, तलवार से नहीं, विचार से हुआ मतांतरण
रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता
बरेली। इतिहास, मतांतरण और भारतीय मुसलमानों की उत्पत्ति को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। बरेली के मौलाना मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा है कि भारत में इस्लाम स्वीकार करने वाले अधिकांश लोग इसी देश के मूल निवासी थे। उनके अनुसार, आज जो मुसलमान भारत में रह रहे हैं, वे पूर्व में हिंदू समाज से ही जुड़े रहे हैं।
‘अरब से सीमित लोग आए’
मौलाना शहाबुद्दीन ने बयान जारी कर कहा कि अरब देशों से बहुत कम संख्या में लोग भारत आए थे। उन्होंने कहा कि देश में रहने वाले करोड़ों मुसलमानों की जड़ें इसी मिट्टी में हैं। उनका कहना है कि इस्लाम की शिक्षाओं और सामाजिक परिस्थितियों से प्रभावित होकर लोगों ने अलग-अलग समय में धर्म परिवर्तन किया।
उन्होंने इस आरोप को खारिज किया कि बड़े पैमाने पर तलवार के बल पर धर्म परिवर्तन कराया गया। मौलाना ने कहा कि कई इतिहासकार भी मानते हैं कि सामाजिक, आर्थिक और आध्यात्मिक कारणों से विभिन्न कालखंडों में मतांतरण हुए।
लखनऊ में संघ प्रमुख का बयान
दरअसल, हाल ही में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने लखनऊ प्रवास के दौरान कहा था कि भारतीय मुसलमानों की जड़ें भी हिंदू समाज से जुड़ी रही हैं। उनके इस बयान के बाद देशभर में विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं। अब बरेली से मौलाना शहाबुद्दीन का समर्थन आने के बाद यह विषय फिर चर्चा में आ गया है।
‘घर वापसी’ शब्द पर टिप्पणी
मौलाना ने ‘घर वापसी’ शब्दावली पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को उसके वर्तमान धर्म से हटाकर दूसरे धर्म में लाया जाता है तो वह भी मतांतरण की ही श्रेणी में आता है। उनके मुताबिक, देश में मतांतरण को लेकर कानून मौजूद है, ऐसे में शब्द बदल देने से प्रक्रिया की प्रकृति नहीं बदलती।
जनसंख्या के मुद्दे पर क्या कहा
मुसलमानों की जनसंख्या को लेकर उठने वाले सवालों पर मौलाना ने कहा कि मौजूदा समय में बढ़ती महंगाई के बीच कोई भी परिवार अधिक संतान नहीं चाहता। उन्होंने कहा कि जनसंख्या वृद्धि को किसी एक समुदाय से जोड़कर देखना उचित नहीं है।
मौलाना शहाबुद्दीन के इस बयान के बाद एक बार फिर इतिहास, मतांतरण और सामाजिक समरसता को लेकर बहस तेज होती दिख रही है। बरेली से आई यह प्रतिक्रिया राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे विमर्श को नया आयाम दे सकती है।