
‘नारायण’ नाम ने किया अजामिल का उद्धार, भागवत कथा में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
कलयुग में नाम ही है तारनहार: आचार्य श्याम बिहारी चतुर्वेदी
भागवत कथा में गूंजी ‘राधे-गोविंद’, नाम महिमा सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु
रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता
बरेली। राजेंद्र नगर स्थित बांके बिहारी मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस पर श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। वृंदावन धाम से पधारे कथावाचक आचार्य श्याम बिहारी चतुर्वेदी ने नाम महिमा का विस्तृत वर्णन करते हुए कहा कि कलयुग में भगवान के नाम का स्मरण ही मोक्ष का सर्वोत्तम साधन है।
कथा प्रसंग में उन्होंने अजामिल की कथा सुनाते हुए बताया कि अजामिल एक ब्राह्मण परिवार में जन्मे और प्रारंभ में कर्मकांड में निपुण थे। किंतु बुरे संग के कारण उनका जीवन पथभ्रष्ट हो गया। उन्होंने अधर्म का मार्ग अपनाया और परिवार पालन के लिए चोरी-डकैती तक करने लगे। समय बीतने पर उनके घर दस संतानों का जन्म हुआ।

आचार्य ने बताया कि एक दिन संतों का एक समूह उनके घर पहुंचा। संतों ने उन्हें समझाया और दसवें पुत्र का नाम ‘नारायण’ रखने का आशीर्वाद दिया। पुत्र मोह में अजामिल दिन-रात ‘नारायण’ नाम का उच्चारण करने लगे। जीवन के अंतिम क्षणों में जब यमदूत उन्हें लेने पहुंचे, तब भयवश उन्होंने अपने पुत्र को पुकारा। किंतु भगवान के नाम का उच्चारण होते ही विष्णु के पार्षद प्रकट हुए और उन्हें यमदूतों से मुक्त कर दिया।
आचार्य ने कहा कि भले ही अजामिल ने अपने पुत्र को पुकारा हो, लेकिन भगवान के नाम की शक्ति ने उन्हें पापों से मुक्त कर दिया। यही नाम की महिमा है, जो मनुष्य को भवसागर से पार लगाने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा कल्याण का ऐसा माध्यम है, जो जीवन की दिशा बदल सकती है।
कथा के दौरान ‘राधे-राधे गोविंद, गोविंद राधे’ के जयघोष से मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंचे।
इस अवसर पर भजन गायक जगदीश भाटिया, दीपक भाटिया, विनोद खंडेलवाल, विनीता खंडेलवाल, सोनम खंडेलवाल, रजत खंडेलवाल, आयुष सिंह, सीमा राठौर और राघवेंद्र राठौर सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।