
नेपाल से विवाह कर आई महिलाओं को तुरंत नहीं मिलेगा मताधिकार
नेपाल मूल की बहुओं को वोटर बनने से पहले लेनी होगी भारतीय नागरिकता
सीमा पार शादियों पर चुनाव आयोग सख्त, मतदाता सूची को लेकर नए निर्देश
नेपाल से आई बहुएं नहीं बनेंगी सीधे मतदाता, बच्चों को मिलेगा नागरिक अधिकार
रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में नेपाल से होने वाली शादियों को लेकर मतदाता सूची से संबंधित नियमों को और स्पष्ट कर दिया गया है। नेपाल से विवाह कर भारत आई महिलाएं तब तक मतदाता नहीं बन सकेंगी, जब तक वे भारतीय नागरिकता प्राप्त नहीं कर लेतीं। चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से यह निर्देश प्रभावी किया गया है।
अधिकारियों के अनुसार, केवल विवाह के आधार पर किसी विदेशी नागरिक को मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जा सकता। नेपाल से आई बहुओं को पहले निर्धारित प्रक्रिया के तहत भारत की नागरिकता लेनी होगी, उसके बाद ही उनका नाम वोटर लिस्ट में जोड़ा जा सकेगा। हालांकि, ऐसे दंपतियों से जन्मे बच्चों को जन्म के आधार पर भारतीय नागरिक माना जाएगा और उनके वयस्क होने पर मतदाता सूची में नाम शामिल किया जाएगा।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के कई सीमावर्ती जिलों—जैसे महाराजगंज, बलरामपुर, गोंडा, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी और पीलीभीत—में नेपाल के साथ सामाजिक और पारिवारिक रिश्ते काफी पुराने हैं। इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में युवक नेपाल में विवाह करते हैं, जिसके चलते यह स्थिति लंबे समय से बनी हुई है।
प्रशासन का कहना है कि यह फैसला किसी समुदाय या क्षेत्र विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि संविधान और नागरिकता कानून के अनुरूप लिया गया कदम है। मतदाता सूची को सही और विश्वसनीय बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों की गहन जांच की जाएगी। संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन पूरी सतर्कता से किया जाए।