राम के आदर्शों को अपनाकर माता-पिता की सेवा करे – स्वामी डॉ उमाकांतानन्द सरस्वती जी महाराज

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राम के आदर्शों को अपनाकर माता-पिता की सेवा करे – स्वामी डॉ उमाकांतानन्द सरस्वती जी महाराज

रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता

बरेली! स्वामी डॉ. उमाकांतानंद सरस्वती महाराज द्वारा रामकथा के छठवां दिन भगवान श्री राम के आदर्श चरित्र, माता-पिता की आज्ञा का पालन और वनवास गमन के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया। महाराज ने बताया कि राम का जीवन त्याग और समर्पण का सर्वोच्च उदाहरण है। श्रोताओं को जीवन में राम के आदर्शों को अपनाने और युवाओं को माता-पिता का सम्मान करने के लिए प्रेरित किया गया।

महाराज जी ने राम के वनवास प्रसंग की भावपूर्ण व्याख्या की। उन्होंने कथा में भगवान राम के आज्ञाकारी स्वरूप और माता-पिता के प्रति उनके अटूट प्रेम को रेखांकित करते हुए, युवाओं को माता-पिता का सम्मान करने का संदेश दिया।

महाराज ने वर्णन किया कि कैसे राम ने बिना प्रश्न किए दशरथ के वचनों का पालन करते हुए 14 वर्ष के वनवास को स्वीकार किया। वर्तमान समय में वृद्ध माता-पिता की उपेक्षा पर चिंता व्यक्त करते हुए राम की तरह आज्ञाकारी बनने का संकल्प दिलाया गया।

श्री राम बिना सवाल किए 14 वर्ष के वनवास के लिए निकले, जो उनके आज्ञाकारी होने का प्रमाण है। अयोध्यावासियों के प्यार और राम के समर्पण को भावपूर्ण संगीतमय भजनों के माध्यम से सुनाया। कथा के दौरान सुरीले भजनों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।

संगीतमय श्री राम कथा का छठवां दिन

स्वामी जी ने वर्तमान कलयुग में बढ़ते वृद्धाश्रमों को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए, युवाओं को राम के आदर्शों को अपनाकर माता-पिता की सेवा करने का संकल्प दिलाया।कथा में श्री राम के पवित्र नाम की महिमा और आत्म-जागरण के लिए नाम जाप को महत्वपूर्ण बताया गया

कथा के मुख्य संयोजक पूर्व गवर्नर पी पी सिंह – चेयरमैन पूजा सेवा संस्थान, आर्ट एरेना के प्रबंध निदेशक संजय अग्रवाल, रोटरी के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर राजन विद्यार्थी, भाजपा नेता पप्पू भरतौल, मनीष अग्रवाल- अध्यक्ष व्यापार मंडल एवं क्षेत्रीय सह मीडिया प्रभारी, ब्रज क्षेत्र , पूर्व रोटरी गवर्नर एवं पूर्व मेयर डॉ आई एस तोमर, पूर्व रोटरी गवर्नर एवं वरिष्ठ आर्थोपेडिक्स सर्जन डॉ रवि मेहरा सहित रोटरी क्लब ऑफ बरेली नॉर्थ एवं इनर व्हील क्लब ऑफ बरेली न्यू नॉर्थ की प्रेसिडेंट मालती देवी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति सहित कई भक्त सक्रिय रूप से मौजूद थे।

Saurabh Gupta
Author: Saurabh Gupta