
बोगस फर्मों के जाल का पर्दाफाश, जीएसटी रिफंड घोटाले का एक और आरोपी दबोचा
क्राइम ब्रांच ने गाजियाबाद से दबोचा योगेश शर्मा, मास्टरमाइंड दंपती अब भी फरार
20 करोड़ से ज्यादा की सरकारी चपत, हवाला कनेक्शन की भी जांच
रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता
बरेली। फर्जी कंपनियों के सहारे करोड़ों रुपये के जीएसटी रिफंड घोटाले में शामिल गिरोह पर क्राइम ब्रांच का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। इसी कड़ी में पुलिस ने गिरोह के अहम सदस्य योगेश शर्मा को गाजियाबाद से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को कोर्ट में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
हालांकि इस संगठित फर्जीवाड़े के कथित मास्टरमाइंड मनीष अग्रवाल और उसकी पत्नी अपर्णा अग्रवाल अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं, जिनकी तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है।
फर्जी ई-वे बिल से उड़ाया गया जीएसटी रिफंड
क्राइम ब्रांच के विवेचक इंस्पेक्टर संजय धीर के अनुसार, मेरठ के थाना परतापुर क्षेत्र के ग्राम छजुपुर निवासी योगेश शर्मा लंबे समय से फरार चल रहा था और गाजियाबाद के राज एक्सटेंशन स्थित केडीपी सवाना अपार्टमेंट में छिपकर रह रहा था। सूचना मिलने पर गुरुवार को टीम ने दबिश देकर उसे धर दबोचा।
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि योगेश शर्मा ने बरेली निवासी मनीष अग्रवाल और गौरव अग्रवाल के साथ मिलकर श्याम ट्रेडर्स नाम से एक बोगस फर्म खड़ी की थी। इस फर्म का जीएसटी रजिस्ट्रेशन बरेली में कराया गया और बाद में फर्जी ई-वे बिल के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट पास कराकर मोटा जीएसटी रिफंड निकाल लिया गया।
इस नेटवर्क में अपर्णा अग्रवाल, आदि उर्फ युगांश बिसारिया समेत कई अन्य लोगों की संलिप्तता भी सामने आई है। इससे पहले क्राइम ब्रांच गौरव अग्रवाल को गिरफ्तार कर चुकी है।
20 करोड़ से ज्यादा का घोटाला, हवाला लिंक की भी जांच
जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस संगठित गिरोह ने सरकारी खजाने को 20 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान पहुंचाया है। आरोपियों के बैंक खातों की जांच में करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन के सबूत मिले हैं।
गिरफ्तारी के समय योगेश शर्मा के पास से एक मोबाइल फोन भी बरामद किया गया है, जिसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है। पुलिस को उम्मीद है कि इससे अन्य आरोपियों, फर्जी फर्मों और लेनदेन से जुड़े अहम सुराग मिल सकते हैं।
सूत्रों की मानें तो इस पूरे नेटवर्क के हवाला कारोबार से जुड़े होने की भी आशंका है। आरोपी पुलिस से बचने के लिए बार-बार फर्मों के पते बदलते थे और किराये की दुकानों व मकानों के पते पर फर्जी कंपनियां खड़ी करते थे।
क्राइम ब्रांच का कहना है कि मामला संगठित अपराध की श्रेणी में आता है और आगे चलकर आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है। फरार आरोपियों की तलाश में टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।